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Desi छोटी बहन के साथ

गुड्डी बोली, “तुम तो ताशी मेरा गाँड़ मराई देखने का कीमत अपना बूर चुदा कर चुकाई, और क्या आशी फ़ोकट में मेरा गाँड़ मराई देखती… उसको भी तो इसका कीमत चुकाना चाहिए… तो वह इसका कीमत लन्ड का माल खा कर चुकाई।” आशी सिटपिटा कर चुप ही रही… पर मैं हँस पड़ा।

मेरा लन्ड अब शायद वियाग्रा के असर में था, टन्टनाया हुआ… और तैयार। मेरे लन्ड को हल्के से एक चपत लगाई गुड्डी और मैं आह्ह… कर बैठा तो वो बोली, “मेरी गाँड़ फ़ाड़ोगे और मेरा एक थप्पड़ नहीं खाओगे… ऐसा कैसे होगा।” इसके बाद को थोड़ा और जोर से जल्दी-जल्दी ५ थप्पड़ गुड्डी ने मेरे फ़नफ़नाए हुए लन्ड को लगा दिए और मैं अब दर्द महसूस करके चिहुँक कर पीछे हटा। गुड्डी मुझे परेशानी में देख कर खिल्खिलाई और बोली, “आ जाओ अब… फ़ाड़ो मेरी गांड़”। मुझे गुस्सा आया और फ़िर अपने गुस्से पर काबू करते हुए मैने गुड्डी को बिस्तर पर खींचा, “साली… मादरचोद… रन्डी…”। गुड्डी अब स्वीटी से बोली, “जरा वो कन्डोंम ला दो”, फ़िर मुझसे बोली, “कन्डोम पहन कर गाँड़ मारना डीयर”। मैंने जब कंडोम अपनी बहन के हाथ से लिया तो वो बोली, “लाईए मैं पहना देती हूँ”, और फ़िर वो बडे प्यार से कंडोम को पैकेट से निकाल कर मेरे लन्ड पर पहनाने लगी। उसने कंडोम को पहले ही खोल दिया था, अनुभव हीन थी मेरी बहन। मैंने उसको बताया कि सही तरीके से लन्ड के ऊपर कंडोम कैसे चढ़ाते हैं और फ़िर गुड्डी को पास में खींचा। गुड्डी क्रीम को अपने गाँड़ की गुलाबी छेद पे मल रही थी और फ़िर धीरे-धीरे अपनी ऊँगली से अपने गाँड़ की छेद को गुदगुदा भी रही थी। मैं भी अब उसकी देखा-देखी उसकी गाँड़ को अपने ऊँगली से खोदने लगा। वो खिब सहयोग कर रही थी। जल्दी हीं उसका गाँड़ का छेद अब खुल गया और भीतर का हल्का गुलाबी हिस्सा झलकने लगा था, तब वो बिस्तर पकड़ कर निहुर कर सही पोज में आ गई और फ़िर मुझे बोली, “आ जाओ और धी-धीरे घुसाना… एक बार में नहीं होगा तो धीरे-धीरे दो-चार बार कोशिश करना, चला जाएगा भीतर…”। मैं अब पहली बार गाँड़ मारने के लिए तैयार हुआ और फ़िर उसकी गाँड़ की छेद पर लगा दिया और फ़िर भीतर दबाने लगा।

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तीन बार के बाद मेरा सुपाड़ा भीतर घुस गया। गुड्डी लगातार पूछ रही थी कि कितना गया भीतर। उसे दर्द हो रहा था पर वो सब बर्दास्त कर रही थी। जब मैंने सुपाड़ा भीतर जाने की बात बताई तो बोली, ठीक है अब बिना बाहर खींचे लगातार भीतर दबाओ गाँड़ में…मुझे जोर से पकड़ना और छोड़ना मत अब। बाकी तीनों लड़कियाँ वहीं पास में बैठ कर सब देख रही थी पर सारा ध्यान अभी गुड्डी की गाँड़ पर था। मैंने गुड्डी मे बताए अनुसार ही ताकत लगा कर अपना लन्ड भीतर घुसाने लगा और गुड्डी दर्द से बिलबिला गई थी। अपनी कमर हिलाई जैसे वो आजाद होना चाहती हो। पर मैंने तो उसको जोर से पकड़ लिया था, जैसा उसने कहा था और बिना गुड्डी की परवाह किए पूरी ताकत से अपना लन्ड उसकी टाईट गाँड़ में पेल दिया। जब आधा से ज्यादा भीतर चला गया तब गुड्डी बोली, “अब रुक जाओ… बाप रे… बहुत फ़ैल गया है दर्द हो रहा है अब… प्लीज अब और नहीं मेरी गाँड़ फ़ट जाएगी।” मैंने उसको बताया कि करीब ६” भीतर चला गया है और अब करीब २” हीं बाहर है तो वो अपना हाथ पीछे करके मेरे लन्ड को छु कर देखी कि कितना भीतर गया है और फ़िर बोली, “अब ऐसे ही आगे-पीछे करके मेरी गाँड़ मारो… बाकी अपने भीतर चला जाएगा”। मैं अब जैसा उसने कहा था, गुड्डी की गाँड़ मारने लगा… और फ़िर देखते देखते मुझे लगा कि उसका गाँड़ थोड़ा खुल गया हो और फ़िर धीरे-धीरे उसकी गाँड़ मेरा सारा लन्ड खा गई। करीब ५ मिनट गाँड़ मराने के बाद वो मुझे लन्ड बाहर निकालने को बोली, और फ़िर आराम से गुड्डी उठी और मुझे बिठा कर मेरी गोद में बैठ गई… गाँड़ में इस बार उसने खुद भी मेरा लन्ड घुसा लिया था। मुसकी गाँड़ अब खुल गई थी। मेरे सीने से उसकी पीठ लगी हुई थी और सामने से अपनी बूर खोल कर वो मेरे घुटनो पर अपने पैर टिकाए बैठ कर बोली, “कोई आ कर मेरी बूर में ऊँगली करो न हरामजादियों… सब सामने बैठ कर देख रही हो।” ताशी और आशी दोनों बहने अब गुड्डी की बदन को सहलाने लगे थी और तभी वो उन सब को हटा कर ऊपर से मुझे चोदने लगी, बल्कि ऐसे कहिए कि मेरे लन्ड से अपना गाँड़ मराने लगी। यह सब सोच अब मुझे दिमाग से गरम करने लगा और जल्द हीं मेरा पानी छूटा…. मेरे कन्डोम ने उस पानी को कैन कर लिया और गुड्डी भी सब समझ कर उठी और मेरा कन्डोम एक झटके से खींच कर एक तरफ़ फ़ेंक दिया और फ़िर बिस्तर पर फ़ैल कर अपने हाथ से अपना गाँड़ खोल कर बोली, “आओ हरामी, एक बार और मार लो मेरी गाँड़ बिना कन्डोम के…”।

मैं भी तुरन्त उसके ऊपर चढ़ कर उसकी गाँड़ में लन्ड घुसा दिया। अब उसका गाँड़ पूरी तरह से खुल गया था…. खुब मन से इस बार मैंने उसकी गाँड़ मारी करीब १० मिनट तक और फ़िर उसकी गाँड़ में हीं झड़ गया। अब तक मैं बहुत थक गया था, बल्कि हम दोनों तक गये थे सो हम एक तरफ़ हो निढ़ाल पड़े रहे और लम्बी-लम्बी साँसे लेते हुए अपनी थकान मिटाने का प्रयास करने लगे।


करीब ५ मिनट बाद हम दोनों उठे, गुड्डी अब नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी और हम सब लोग अपने कपड़े वगैरह ठीक करने लगे। ताशी और आशी दोनों की साँस भी अब ठीक हो गई थी। घड़ी में अब करीब १ बज गया था और मेरे ट्रेन के लिए अब निकलने का समय भी नजदीक हो गया था। मैंने ताशी, आशी से उनका पता और नम्बर लिया और फ़िर उन दोनों को उनके होठों पर चुम्मी ले कर विदा किया। उन दोनों के मम्मी-पापा आ गए थे। गुड्डी जब नहा धो कर बाहर आई तो मैं तैयार होने चला गया। फ़िर हम सब एक साथ ताशी के कमरे में गए और फ़िर उस पूरे परिवार से विदा लिया। ताशी के मम्मी-पापा ने मुझे कहा भी कि कभी अगर आना हुआ तो उनके घर भी मैं जरुर आउँ… और मैंने उन दोनों बहनों की तरफ़ देखते हुए कहा, “जरुर…” और फ़िर उन्हें नमस्ते कह कर बाहर आ गया। फ़िर मैं स्वीटी और गुड्डी के साथ होटल छोड़ कर बाहर आ गया और फ़िर साथ हीं स्टेशन के लिए चल दिए। दोनों लड़कियाँ मुझे ट्रेन में बिठा कर वापस अपने कौलेज लौट गईं। मैंने उन दोनों को गले से लगा कर विदा किया, और तब स्वीटी मेरे कान में बोली, “अब आपको पता चलेगा…. बहुत मस्ती किए हैं यहाँ…. वैसे वहाँ भी विभा दी तो हैं हीं, पर वो मेरे जैसे नहीं है… बहुर शर्मिली है, कुछ गड़बड़ मत कर लीजिएगा…”। मैंने हल्के से उसके गाल पर थपकी दी और फ़िर उन दोनों को विदा कर दिया।

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ट्रेन समय से खुल गई, और अब मैं अपनी सीट पर लेटा पिचले कुछ दिनों के घटनाओं के बारे में सोचने लगा। सब कुछ एक सपना जैसा लग रहा था।घर आए हुए मुझे एक महीना होने को आया। बार-बार मुझे अपने उन दिनों की याद आ रही थी जब मैंने खुला खेल फ़र्रुखाबादी खेला था। हर दो-चार दिन पर स्वीटी से फ़ोन से बात करता और हर बार अपने उन सुनहरे दिनों की याद जरुर दिलाता। वो भी हँसती और मुझे थोड़ा धैर्य रखने को बोलती, कहती कि जब छुट्टियों में आएगी तो वो सब कसर पुरा कर देगी। ऐसे में ही एक दिन गुड्डी से बात हुई और उसने पहली बार मुझे अपनी मँझली बहन विभा को फ़ँसाने को कहा। उस दिन के पहले मुझे भी कभी-कभी यह विचार आता था पर विभा का छुईमुई रुप मुझे उस दिशा में बढ़ने से रोक देता था। स्वीटी ने बताया भी था कि विभा का स्वभाव थोड़ा अलग है और वो शादी के पहले अपनी बूर में ऊँगली भी करने से हिचकती है और स्वीटी को भी वो हमेशा मना करती रहती जब भी स्वीटी अपने प्राईवेट पार्ट्स से कभी खेलती। आज गुड्डी ने मेरे उसी आग को हवा दे दी थी और मैं भी सोचने लगा कि अगर एक बार विभा को जवान बदन क सही मजा मिल जाए तो शायद वो भी खुल जाए। गुड्डी ने इसी दिशा में मुझे आगे बढ़ाया और मुझे विश्वास दिला दिया कि मुझे कुछ करना चाहिए। वो खुद भी पहले यह सब खराब मानती थी पर जब एक बार सेक्स का मजा मिला तो जैसे उसको अब नशा सा हो गया था।


मुझे लगा कि गुड्डी ठीक बोल रही है और मैं अब विभा के बारे में सोचने लगा और तय किया कि अब घर पर थोड़ा सेक्सी महौल बनाउँगा तो शायद कुछ बात बने।उस शाम मैंने खाना-वाना खाने के बाद अपने कमरे में कम्प्युटर पर एक ब्लू-फ़िल्म लगा ली। मैं ब्लू-फ़िल्म पहले भी देखता था पर तब हेड-फ़ोन लगा कर देखता था और आज मैंने स्पीकर औन कर दिया था और आवाज भी थोड़ी तेज कर दी थी। विभा अपने कमरे में कुछ पढ़-लिख रही थी पर मैं चाहता था कि उसको पता चले कि मैं ब्लू-फ़िल्म देख रहा हूँ। एक विदेशी फ़िल्म थी जिसमें दो लड़कियाँ दो लड़कों के साथ सेक्स कर रही थी एक ही रुम में। लन्ड चुसाई का सीन था और हल्के हल्के से सेक्सी आवाजें शुरु हो गई थी। जल्दी हीं दोनों की चुदाई शुरु हो जाती और मुझे पता था कि तब जो सेक्सी आवाजे निकलेगीं वो विभा के कानों तक जरुर जाएँगी। अचानक मुझे थोड़ी शर्म लगी और मैंने कमरा बन्द कर दिया पर आवाज वैसे ही तेज रहने दी। मैंने उस फ़िल्म को देखते हुए दो बार मुठ मारी, पर विभा का कोई रिएक्शन नहीं हुआ। मुझे लग गया कि विभा को मैं शायद ना चोद पाउँ। अगली सुबह नास्ते के तेबुल पर विभा बोली, “कल भैया, क्या कौन फ़िल्म देख रहे थे आप कि सिर्फ़ हल्ला ही हो रहा था और सिर्फ़ “आह आह… और फ़क मी फ़क मी” ही डायलौग था। मुझे नहीं लगा कि विभा सब जान-बुझ कर पूछ रही है, वो मासूम सी दिख रही थी यह सब पुछते हुए। मैंने थोड़ा सोच कर उत्तर दिया, “एक ब्लू-फ़िल्म थी, बहुत दिन बाद ऐसा फ़िल्म देखने का कल मन हो गया था सो लगा लिया था”।

वो फ़िर बोली, “उसमें डायलौग था ही नहीं तो कहानी क्या होगा, क्या मजा आएगा फ़िर ऐसी फ़िल्म में?” मैं समझ गया कि विभा को कुछ आईडिया नहीं है। मैं हैरान था कि आज के समय में भी बी०ए० की लड़की को ब्लू-फ़िल्म का कोई आईडिया नहीं है। मैंने फ़िर नजर नीची करके कहा कि ब्लू-फ़िल्म में कहनी नहीं देखा जाता है, सीन देखा जाता है। उसमें कलाकार को सिर्फ़ अच्छे से सेक्सी सीन देना होता है।” मेरे शब्द विभा के भोलेपन के आगे थोड़े शर्माए हुए थे। विभा फ़िर बोली, “तो एक घन्टा तक सिर्फ़ एक ही सीन देखते रह गए, बहुत धैर्य है भैया आपमें। हम तो पाँच मिनट में ऊब जाते हैं एक तरह का सीन देखते-देखते।”मैंने अब उससे नजर मिलाई और पूछा, “तुम देखी हो ब्लू-फ़िल्म?” वो आराम से बोली, “हाँ सेक्सी फ़िल्म तो कुछ देखी हूँ, पर ऐसा कुछ नहीं देखी कि एक घन्टा तक सिर्फ़ एक डायलौग – फ़क मी, ही चलता रहे।” मुझे लगा कि वो शायद साधारण वाली फ़िल्म के सेक्स सीन की बात कर रही है सो मैंने थोड़ा पक्का होने के लिए पूछा, “तुम्हें पता है कि ’फ़क’ का हिन्दी में मतलब क्या होता है?” वो नौर्मल तरीके से बोली, “सुनते हैं इधर-ऊधर पर सही मतलब शायद नहीं मालुम… क्या होता है मतलब?” मैं थोड़ा हिचका फ़िर सोचा कि आज रिस्क ले लेता हूँ और फ़िर मैंने कहा, “अंग्रेजी के ’फ़क’ का मतलब है चोदना। ब्लू-फ़िल्म में लड़का-लड़की एक दुसरे को चोदते हैं। कोई कहानी उसमें नहीं होती है, सिर्फ़ सेक्स सीन होता है और ब्लू-फ़िल्म देखने वाले उसी सीन को देखते हैं”। मेरी नजर विभा के चेहरे पर लगी थी कि उसका क्या रिएक्शन है यह सब जान कर। उसने बुरा सा चेहरा बनाया और कहा, “यानि कि आप कल गन्दी फ़िल्म देख रहे थे….. आप ऐसी फ़िल्म देखते हैं?” अब मैं घबड़ाया और बोला, “नहीं पर कल बहुत मन कर गया था इसीलिए… सौरी अब नहीं देखुँगा।” अब विभा बोली, “नहीं… आप देखिए अगर आपको अच्छा लगता है।” उसके चेहरे से थोड़ी नाराजगी झलकी। मैंने उसकी खुशामद करते हुए कहा, “नहीं विभा, मुझे नहीं पता था कि तुमको इतना बुरा लग जाएगा। वो तो आज दोपहर में एक एमएमएस देख लिया था विनीत के फ़ोन में आज थोड़ा मन कर गया।” वो अब बोली, “विनीत भैया अपने फ़ोन में यही सब रखते हैं? ऐसे तो बहुत पत्नी-भक्त बने रहते हैं। भाभी मिलेंगी तो हम बताएंगे उनको यह सब।” मैंने अब असल धमाका किया, “उसी भाभी की तो थी वो एमएमएस… विनीत बनाया था जब वो मूली से खेल रही थी।” अब विभा शौक्ड थी…. थोड़ी देर बाद बोली, “कैसे वो बनवा ली ऐसी गन्दी क्लीप? वो लगती तो नहीं है जरा भी ऐसी?”


मैंने अब थोड़ा खुल कर कहा, “असल में विभा, तुम को शायद पता नहीं है… एक बार अगर सेक्स का मजा मिल जाता है तो हर कोई और ज्यादा मजा के लिए कुछ भी कर लेता है। तुम अभी कुँवारी हो इसीलिए ऐसा कह रही हो…। इसमें गन्दा क्या है? वो अपने हस्बैन्ड को खुश करने के लिए क्लीप बनवा ली। तुम्हारा पति अगर तुम्हारी नंगी फ़ोटो लेना चाहेगा तो तुम भी खींचवा लोगी।” विभा भी बोली, “ठीक है यह सब… पर यह क्या कि विनीत भैया अपनी बीवी की फ़ोटो सब को दिखाते घुम रहे हैं?” मैं अब बोला, “सब को नहीं अपने सब्से अच्छे दोस्त को, और इसकी क्या गारन्टी है कि तुम्हारा पति तुम्हारी नंगी फ़ोटो अपने दोस्तों को नहीं दिखाएगा?” वो अब चुप हो गई थी। फ़िर हम दोनों ने नास्ता खत्म किया और जब मैं काम पर जाने लगा तब विभा मेरे कमरे में आ कर बोली, “आज जब मौका मिलेगा हम भी वो फ़िल्म देखेंगे, किस डायरेक्टरी में है? मैंने उसको बता दिया और खुश हुआ कि आज विभा शायद पहली बार असल वाली ब्लू-फ़िल्म देखेगी। उस डायरेक्टरी में करीब ६० अलग-अलग टाईप की ब्लू-फ़िल्म थी। वो एक खजाना था मेरी हार्ड-डिस्क पर। घर से जाते हुए मैं सोच रहा था कि आज तो विभा जरुर ब्लू-फ़िल्म देखेगी अकेले में और शाम को पता नहीं कैसे रिएक्ट करेगी। थोड़ा डर था दिल में, पर साथ हीं एक खुशी भी थी कि आज विभा को सेक्सी बनाने की दिशा में कुछ प्रगति तो हुई। मैंने तय कर लिया कि आज शाम में अगर वो इस बारे में चुप रही तो मैं खुद उसके साथ बात करते हुए इस विषय को उठाऊँगा। मैं अब खुश था।

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खैर आज का दिन खुब व्यस्त साबित हुआ और बिजनेस के लिहाज से अच्छा भी रहा। इसको मैंने अपने लिए एक शुभ शगुन माना। शाम को करीब ९ बजे मुझे फ़ुर्सत मिली और मैं घर की तरफ़ चल पड़ा।पूरे रास्ते मेरे दिमाग पर विभा और ब्लू-फ़िल्म ही छाया रहा। ९:३० बजे घर में घुसते समय विभा ने सामान्य तरीके से पूछा कि नहाना है या खाना लगा दे। मैंने नहाने की बात कही, और वो तब बोली कि जल्दी कीजिए, हम खाना गर्म करने जा रहे हैं। उस दिन न चाहते हुए भी मुझे विभा को दिमाग में रख कर मूठ पड़नी पड़ी। शायद विभा के नाम पर आज पहली बार मूठ निकाल रहा था मैं। मैं आम तौर पर जब तक स्वीटी को नहीं चोदा था तब तक अपनी सबसे बड़ी बहन प्रभा के नाम की मूठ निकालता था फ़िर जब स्वीटी के साथ चुदाई का रिश्ता बन गया तब अक्सर उसके नाम की मूठ निकलता था। नहा कर जब मैं डिनर टेबुल पर आया तो विभा अपना और मेरा खाना परोस कर मेरा इंतजार कर रही थी। हम दोनों खाना खाने लगे। विभा के तरफ़ से कुछ ऐसा नहीं लगा कि वो आज पहली बार ब्लू-फ़िल्म देखी है। इधर-उधर की बाते होती रही और खाना लगभग खत्म होने को आया तब मैंने हीं पूछा, “आज देखी थी वो फ़िल्म तुम?” विभा ने हल्के से हूं कहा तो मैंने पूछा, “कैसा लगा?” अब वो बोली, “गन्दा”। मुझे अब समझ नहीं आया कि अब बात कैसे आगे बढ़े तो मैं चुप हो गया। अब विभा ने बात शुरु की, “इतना सारा फ़िल्म आप कहाँ से जमा कर लिए हैं भैया?” मैं बात के तार फ़िर से जोड़ते हुए कहा, “इधर-उधर से ले कर, क्यों? तुम सब देख ली?” विभा बोली, “सब एक दिन में देखा जा सकता है क्या? कई को थोड़ा-थोड़ा देखा…दस-बारह को। कुछ था हीं नहीं कहानी-वहानी तो क्या देखती?” मैंने तब कहा, “तुम किसी एक फ़िल्म को पूरा देखती तब मजा आता। कल किसी एक फ़िल्म को पूरा देखना एक बार। मेरे रहते देखोगी तो शायद लाज लगे।” वो बोली, “एक देखी न पूरा… बहुत गन्दा था।


सब लड़के लग रहा था कि उस बेचारी लड़की को जान से मार देंगे। सब टीचर अपने हीं मजा के चक्कर में थे।” मुझे समझ में आ गया कि वो किस फ़िल्म की बात कर रही थी। एक फ़िल्म थी जिसमें ५ मर्दों ने मिल कर एक हाई-स्कूल की लड़की को क्लास-रुम में हीं चोदे थे। सब थे तो प्रोफ़ेशनल कलाकार पर फ़िल्म में टीचर बने हुए थे और लड़्की भी एक कमसीन, कम-उम्र लड़की थी जो हाई-स्कूल छात्रा के रोल में फ़िट थी। वो कलाकार लड़की एबलिन्डा थी। मैंने विभा से कहा, “वो सब तो ऐक्टिंग है, वो जान क्यों लेंगे बेचारी का। लड़की को पाँच गुणा पैसा मिला होगा कम-से-कम उस फ़िल्म का।” विभा बोली, “हमको तो उसके दशा पर दया आ रहा था, बेचारी अन्तिम १२-१५ मिनट तो एक दम बेजान सी झेल रही थी सब चुप-चाप और उन लोगों को उसके इस दशा से कोई फ़र्क नहीं पर रहा था।” बेचारी के चेहरे पर दर्द झलक रहा था। मैं बोला, “तुम शुरु में हीं ऐसा फ़िल्म बेकार देखी। सीधा-सादा एक लड़का-एक लड़की वाला कोई फ़िल्म देखती तो प्यार दिखता। ऐसी फ़िल्म में खुब प्यार दिखता है कलाकार सब में।” विभा अब बरतन उठाते हुए बोली, “पता नहीं पर उस फ़िल्म में तो लगा कि बेचारी का बलात्कार हो रहा है।” वो किचेन में चली गई और मैं सोचता रह गया कि अब आगे क्या…? मैं अपने कमरे में आ गया और बिस्तर ठीक कर रहा था जब विभा कमरे में आई और बोली, “आप अब बताईए कि किसमें प्यार दिखेगा। अभी १०:३० बज रहा है, एक घन्टा के करीब तो अभी जग सकते हैं।” मैं भक्क…. विभा अब क्या मेरे साथ बैठ कर ब्लू-फ़िल्म देखेगी? मैंने दिल के लड्डू दिल में हीं फ़ोड़े और तुरन्त कंप्युटर औन कर दिया। मैंने जल्द हीं एक क्लीप चुनी हनीमून वाली। २५ मिनट की बहुत-सुन्दर क्लीप थी और दोनों कलाकार भी बहुत सुन्दर थे। क्लिप बिस्तर पर जोड़े की चुम्मा-चाटी से शुरु हुआ तो मैं कुर्सी से उठ गया और विभा को बोला कि तुम अब कुर्सी पर बैठ कर इस क्लीप को देखो, मैं बाहर टीवी देखता हूँ तब तक। विभा बिना कुछ बोले सामने की कुर्सी पर बैठ गई और अपने नजरें स्क्रीन पर लगा दी।

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मैंने वो क्लिप बहुत बार देखी थी। मैं बाहर निकल गया। मेरे कान कमरे की तरफ़ लगे हुए थे और मैं आवाज सुन सुन कर समझ रहा था कि अब क्या सीन चल रहा है। जब चुदाई अपने चरम पर था तो मैं विभा को देखने के लोभ को रोक नहीं पाया और अपने कमरे में चला गया। विभा अपलक स्क्रीन पर हो रही चुदाई को देख रही थी। मैंने विभा से पूछा, “यह फ़िल्म कैसा है? इसमें तो कुछ गन्दा नहीं है…. पति-पत्नी का सेक्स है और यह तो हर पति-पत्नी में होगा ही।” विभा कुछ नहीं बोली, सिर्फ़ मेरे से एक बार नजर मिलाई और चेहरा फ़िर स्क्रीन की तरफ़ कर लिया। फ़िल्म खत्म हुआ तो क्लोज-अप में लड़की की चुदी हुई चूत दिखा जिसमें से उस लड़के का सफ़ेद माल निकल रहा था। जल्द हीं लड़की उस सफ़ेद माल को अपने चूत पर से काछ कर खा गई और फ़िर बाय के लिए अपने हाथ हिला कर कैमरे की तरफ़ फ़्लाईंग-किस कर दिया। विभा की साँस गहरी हो गई थी और वो बोली, “यह वाला बेहतर है भैया… वो तो बलात्कार था। टीचर-स्टूडेन्ट के बीच ऐसे फ़िल्म को बनाया काहे यह नहीं समझ में आता है। ये लोग हस्बेन्ड-वाईफ़ थे तो यह सब थोड़ा ठीक लग रहा था।” मैंने हँसते हुए कहा, “सब ऐक्टिंग हीं है। हर तरह का फ़िल्म बनता है, हर तरह के चाहने वाले लोग हैं दुनिया में… अभी ११ बजा है, तुम्हारे हिसाब से आधा घन्टा और है, कुछ और देखोगी विभा?” विभा अब मेरे से नजर मिला कर बोली, “आप यह सब फ़िल्म क्यों देखते हैं?” मुझे लगा कि अब थोड़ा खुल जाना चाहिए तो मैं अब बोला, “मजे के लिए… फ़िल्म देखते हुए मुठियाने का अपना मजा है”। वो शायद “मुठियाना” नहीं समझी तो मैं बोला, “हस्तमैथुन”… अगर अभी तुम यहा न होती तो मैं अभी हस्तमैथुन करता फ़िल्म देख कर। शरीर का तनाव निकल जाए तो नींद अच्छी आती है।” अब विभा थोड़ा अजीब नजर से मुझे देख रही थी फ़िर बोली, “आपको जो फ़िल्म पसन्द है एक लगा लीजिए।” मैंने लोहा गर्म देख कर चोट किया, “एक क्लीप से परिवार वाली…. आज तुम साथ हो तो उसी को चला देता हूँ। एक माँ अपने बेटे के साथ सेक्स करेगी और उसकी बेटी फ़िर अपने भाई से चुदेगी।” फ़िल्म शुरु हुई तो विभा बोली, “सब ऐक्टिंग कर रहा होगा कि तीनों एक परिवार का है।” मैंने कहा कि देखते रहो अंत में सब का सर्टिफ़िकेट दिखा कर सब साफ़ कर देगा कि ये तीनों माँ-बेटा-बेटी हैं। माँ अपने बेटे का लन्ड चुस रही थी और बेटी अपनी मम्मी का चूत चाट रही थी। मैं चाह रहा था कि बात-चीत चलती रहे सो मैंने विभा से कहा, “अभी सब तैयार हो रहा है।” जल्दी ही जब सब रेडी हो गए तो बेटी ने मम्मी को सहारा दे कर घुमा दिया और मम्मी अपने बेटे से खड़े लन्ड के सामने अपने हाथों और घुटनों के बल झुकी थी। उसके बेटे ने अपने ठनकते हुए लन्ड को पीछे से अपनी मम्मी की खुली चूत में घुसा दिया और धक्के देने लगा।

जल्दी ही सेक्सी आवाजे स्पीकर से निकल कर मेरे रुम में भर गई। मैं बोला, “इस पोज को डौगी-पोज कहते हैं, किसी कुतिया की तरह लड़की को झुका कर पीछे से चोदा जाता है इस पोज में”। विभा चुप-चाप सब देख रही थी, मैं जब कुछ बोलता तो वो एक बार मेरी तरफ़ सर करके मेरे से नजर मिला लेती। मैंने कहा, “अब जल्द हीं क्लोज-अप शौट आएगा इस माँ-बेटे का”, और वो शौट आ गया। माँ की चिकनी चूत में गच्च-गच्च करके बेटे का लन्ड घुस निकल रहा था। करीब ५ मिनट बाद मैं कहा, “विभा, तुमको मन नहीं करता हस्तमैथुन करने का… मेरा तो बहुत तन गया है”। विभा बोली, “आपको मन है तो आप कर लीजिए”। इअतना सुनने के बाद अब रुकने का सवाल ही नहीं था। विभा के कमरे में रहते मैंने अपना बरमुडा अपने कमर से नीचे सरार कर पैरों से अलग कर दिया और अपने फ़नफ़नाए हुए लन्ड को सहलाने लगा। कुछ सेकेन्ड बीता होगा की विभा मेरी तरफ़ सर घुमाई मेरे कड़े लन्ड को देखा और बोली, “कैसा काला है आपका… गन्दा सा…”, और मुस्कुराई। मैंने हँस कर कहा, “अभी तक गोरा लन्ड सब हीं दिखाए हैं इसीलिए मेरा काला लग रहा है तुमको”। मैंने अपने लन्ड से सुपाड़े को चमड़ी पीछे करके बाहर निकाला। मैं अब आराम से मुठियाने लगा था। तभी फ़िल्म में एक पार्ट खत्म हो गया और जब बेटे का निकलने को हुआ तो वो अपनी बहन को आगे बुलाया और उसकी मुँह में गिराया जिसको वो बहुत आराम से निगल गई।

मैंने अब कहा, “अब इस बहन की बारी है अपने भाई से चुदाने का।” विभा अब बहुत हल्के से बोली, “कैसे कोई अपने घर-परिवार वालों के साथ यह सब कर सकता है…”। मैंने जवाब दिया, “सेक्स में बहुत आकर्षण होता है विभा, मैं कहा था न कि अगर एक बार यह मजा मिल जाए तो फ़िर काबू मुश्किल है…”। विभा अब अचानक पूछी, “आप करते हैं यह सब?” मैंने हाँ में सर हिलाया तो बोली, “किसके साथ?” मैंने कहा, “कोई भी जो मिल जाए…. जब तक शादी नहीं हुई तब तक तो कोई हो क्या फ़र्क पड़ता है… और शादी के बाद भी कौन जानता है क्या हो। शादी के बाद कोई ताला तो कहीं लगता नहीं है।” वो बोली, “सही बात कह रहे हैं आप… वैसे अभी सबसे हाल में किसके साथ किए यह सब।” मैंने थोड़ा सोचा फ़िर कहा, “कसम खाओ कि किसी को कहोगी नहीं तब बताउँगा”। मेरे इस गजब के सीक्रेट में विभा की दिलचस्पी बढ़ी और उसने प्रोमिश किया तो मैं बिना किसी हिचक के कहा, “स्वीटी के साथ”। उसका चेहरा अब देखने वाला था…. “अपनी स्वीटी… ओह भगवान… यह कैसे…”। मैंने साफ़-साफ़ कह दिया कि ट्रेन में कैसे एक ही बर्थ पर सोते हुए मैंने स्वीटी को चोदा। विभा आँखें गोल-गोल करके बोली, “आप दोनों को लाज नहीं आया यह सब करते… वो भी ट्रेन में… बाप रे बाप। उतने दिन आप लोग होटल में थे… फ़िर तो… हे भगवान… कहीं बेचारी को बच्चा हो गया तो..?” मैंने अब उसको शान्त किया, “कुछ नहीं होगा… हम दोनों इतने बेवकुफ़ थोड़े हैं… बच्चा हो जाएगा… बेवकुफ़, अब कहीं किसी से कह मत देना कि हम दोनों भाई-बहन आपस में सेक्स करते हैं, लोग तुमको पागल समझेंगे।” फ़िर विभा बोली, “आप हमको ऊल्लू बना रहे हैं।

झुठ बात सब…. भैया आप ऐसा सब अपनी बहन के लिए कैसे बोल सकते हैं?” मैंने अब सोचा कि अभी नहीं तो फ़िर कभी नहीं सो मैंने कहा, “हमारी क्लीप देखोगी? कोचीन के होटल रुम में बनाए थे।” कहते हुए मैंने अपने अलमारी से वो मेमोरी कार्ड निकाला जिसमें हमारी फ़िल्म थी। इसके बाद अब हमारी असल फ़िल्म औन हो गई। करीब एक घन्टे की क्लीप थी जिसमें मेरा, स्वीटी और गुड्डी का सेक्स का फ़िल्म था। विभा का अब बुरा हाल हो रहा था। कोई भी २० साल की जवान लड़की आखिर कब तक अपने पर काबू रख सकती है। लड़कियों में वैसे भी “काम” मर्दों से आठ-गुणा ज्यादा होता है (कामसुत्र में लिखा है)। मैंने अपना लन्ड झाड़ने के बाद विभा से कहा, “अब तुम भी ऊँगली कर लो नहीं तो नींद नहीं आएगी जितना चुदाई देख ली हो।” वो बोली कि वो कभी यह सब की नहीं है सो डर लग रहा है… तब मैंने कहा कि मैं उसकी मदद कर देता हूँ। ओ घबड़ा गई… नहींईईईई… कहीं बच्चा हो गया तो”। सोच कर हीं उसका मुँह सूख गया। मैंने उसको समझाया कि मैं चुदाई की बात नहीं कर रहा बल्कि हस्तमैथुन की बात कर रहा हूँ। वो सोच में डुबी हुई थी और मैंने मौका सही समझा।मैंने उसको कन्धे से पकड़ कर कुर्सी से उठा लिया और उसको अपने बाँहों में भर कर उसके होठ चुमने लगा।

उसका बदन तप रहा था। बिना बरमुडा के मैं तो पहले से हीं नंगा था। मेरा ठनका हुआ लन्ड उसकी जाँघों पर ठोकर मार रहा था। मैंने उसको कहा, “अब बिस्तर पर चलो तो चुम-चाट कर तुम्हारा बदन ठन्डा कर दें फ़िर सो जाना”। विभा अब गिड़गिड़ाते हुए बोली, “भैया डर लग रहा है… प्लीज।” मैंने समझाया, “चल पगली… बेकार डर रही है। सिर्फ़ चुम्मा-चाटी करेंगे आज तुम्हारे बदन से… बिना तुम्हारे मर्जी के तुमको थोड़े ना चोदेंगे। मेरी बहन हो…. तुमको मेरे से क्यों डर लग रहा है। शादी के पहले प्रभा भी चुम्मा-चाटी करके मजा लेती थी। अब देख ली कि स्वीटी तो खुल कर सब के सामने मेरे से चुदा रही है। असल में अपने यहाँ भैया किसी भी लड़की के लिए सबसे सुरक्षित लड़का है। न वो किसी को कहेगा और न हीं कभी लड़की बदनाम होगी। घर की बात घर में रहेगी।” विभा अब बोली, “क्या दीदी भी आपके साथ….?” मैंने प्रभा के बारे में झुठ बोला था पर अब सच बताने का मौका तो था नहीं सो मैंने हाँ में सर हिला दिया और बोला, “मेरे से चुदवाती नहीं थी पर चुम्मा-चाटी करके अपनी गर्मी जरुर शान्त कराती थी। आज तुमको भी बिना चोदे हीं ठन्डा कर देंगे, तुम बिल्कुल भी डरो मत। जब भी तुमको चुदाने का मन कर जाए, बता देना… खुब प्यार से तुमको चोद देंगे”। और मैंने उसके होठ फ़िर से चुमने शुरु कर दिए। वो अब शान्त हो कर आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर रही थी। मैं अब उसको बिस्तर पर लिटा चुका था और अब बगल में बैठ कर उसकी चुचियाँ दबाने लगा था। विभा की आँख बन्द थी और उसके चेहरे के भाव बदलने लगे थे।

मैंने अब उसकी कुर्ती के ऊपर से अपने हाथ भीतर घुसा दिए और उसकी बाँई चुच्ची को मसलने लगा। वो बहुत मेहनत से अपनी आवाज रोके हुए थी। मैंने उसको पेट के बल पलट दिया और फ़िर उसकी कुर्ती की चेन खोल दी और हल्के से उसके बदन से कुर्ती हटा दिया। सफ़ेद ब्रा में उसका गोरा बदन चमकने लगा।कमरे में दो ट्युबलाईट जली हुई थी और मैंने उसको पीठ के बल कर दिया था। गोरे सपाट पेट और उस पर गहरी नाभी को देख मेरा लण्ड अब एक ठुनकी मार दिया। मेरे हाथ उसकी छाती से होते हुए पेट तक घुमने लगे थे। मैं उसके बगल में बैठ कर अब उसके होठ को जोरदार तरीके से चुमने लगा था। प्राकृतिक स्वभाव ने उसको भी चुम्मी का जवाब देना सीखा दिया था और अब मेरी बहन विभा भी बड़े मजे से मेरी चुम्मी का जवाब अपनी चुम्मी से दे रही थी। पेट से फ़ुसलते हुए मेरे हाथ उसकी सलवार में घुसने लगे तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मेरी नजरों से नजर मिलाकर कहा, “नहीं भैया, प्लीज…”। मैंने उसकी गाल पर चुम्मी ली और कहा, “कुछ नहीं होगा… सिर्फ़ तुमको मजा देंगे।

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अभी तक देखी न कैसे बदन मचलने लगता है जब किसी मर्द का हाथ छुता है किसी लड़की को” और मैंने उसको आश्वस्त करते हुए अपने बाएँ हाथ से उसकी सलवार की डोरी खींच कर खोल दी। फ़िर उसको प्यार से देखते हुए कहा, “थोड़ा कमर ऊपर करो ना तो सलवार को नीचे खींच दें”। विभा ने फ़िर सकुचाते हुए पूछा, “बहुत डर लग रहा है भैया, कुछ होगा तो नहीं न?” मैंने उसको प्यार से समझाया, “पगली… डर काहे का। देखी न स्वीटी इतना मजा से आराम से लन्ड से चुदवा ली… कुछ हुआ। तुम इतना डर रही हो…. स्वीटी से तो बड़ी ही हो। वैसे भी तुम्हारे बदन से मैं अपना लण्ड सटाऊँगा भी नहीं, देख लो कैसा ठनका हुआ है मेरा पर अभी भी तुम्हारे बदन से दो इंच दूर है। सिर्फ़ तुमको नंगा करके अपने हाथ और मुँह से तुमको मजा देंगे। खुला-खुला बदन आज पहली बार ऐसे देख कर कितना अच्छा लग रहा है। तुमको भी अच्छा लग रहा है न…?” मैं अब फ़िर से उसके होठों पर जोर-जोर से चुम्बन लेने लगा था। हल्के से ईशारा किया उसकी कमर को पकड़ कर उठाते हुए और विभा भी अब सहयोग की और अपना कमर ऊपर उठाई तो मैंने सलवार उसकी कमर से नीचे सरार कर उसकी चुतड़ के भी नीचे कर दिया। मैंने अब अपना चेहरा ऊपर उठाया और खुद थोड़ा नीचे खिसक कर सलवार उसके पैरों से निकाल दी।

अब मेरे बिस्तर पर विभा का अधनंगा बदन सिर्फ़ एक सफ़ेद ब्रा और भूरी पैन्टी में फ़ैला हुआ था। मैं झुका और उसकी नाभी पर एक गहरा चुम्बन लिया तो पहली बार उसका बदन थड़थड़ाया, फ़िर पैन्टी के ऊपर से ही उसकी फ़ूली हुई बूर को चुमा तो उसने अपना बदन सिकोड़ा। मैं अब अपना चेहरा उसके पेट से सटा लिया और अपने हाथ उसकी टांगों और जांघों पर घुमाने लगा। भीतरी जांघों पर जब मेरे हाथ गए तो वो जोर से अपनी जाँघ सिकोड़ी। मुझे पता था कि जाँघ का वह इलाका किसी भी लड़की के बदन में सुरसुरी ला देता है। मैं अब प्यार से उसके बदन को चुम रहा था और उसकी कमर सहला रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसको फ़िर से पलट कर पीठ के बल लिटा दिया। विभा भी अब सहयोग कर रही थी। मैंने उसकी फ़ुली हुई चुतड़ों को हल्का दबा कर सहलाया और फ़िर जोर से भींच दिया। वो चिहुंकी… तो मैंने उसकी चुतड़ पर चुम्बन लेने शुरु कर दिए। उसकी बूर पक्का पनिया गई थी, मुझे उसके बूर की मादा गन्ध अब मिलने लगी थी। मैंने उसकी पैन्टी को ऊपर से मोड़ते हुए नीचे करना शुरु किया। आधा चुतड़ उघाड़ करके मैंने उसकी पैन्टी नीचे खिसका दी उसकी नंगी चुतड़ को हल्के से दांत से काटा और फ़िर उन गोरी गोलाईओं को फ़ैला कर उसकी गुलाबी गाँड़ के दर्शन किए। गाँड़ की छेद के बिल्कुल पास एक काला तिल दिखा। मैंने विभा से कहा, “पता है विभा… तुम्हारी गाँड़ को भगवान का आशीर्वाद मिला है।” विभा तो जैसे कहीं और खोई थी। मेरी बात सुन कर उसको होश आया कि मैं उसकी गाँड़ की बात कर रहा हूँ, हड़बड़ा कर वो अपना पैन्टी ऊपर खींची तो मेरी हँसी छुट गई। वो अब चट से सीधी हो कर बिस्तर पर बैठ गई और नजरें नीचे किए वो भोली लड़की मुझे पागल कर रही थी। मैंने उसको अपने बाँहों में लपेटा और एक बार फ़िर से उसकी चुम्मी लेनी शुरु कर दी। विभा भी मेरी बाहों में सिमट कर मुझे सहयोग करने लगी। उसकी चुम्मी लेते हुए मैंने उसकी ब्रा की हुक खोल दी पर उसको ऐसे जोर अपने सीने से चिपकाए हुए था कि उसको पता भी नहीं चला। उसे ममूल हुआ तब जब मैंने उसको अपने बदन से अलग करते हुए उसके कंधों पर से ब्रा की स्ट्रैप मैंने नीचे ससारी। जब तक वो संभलती मैं फ़ुर्ती से उसकी ब्रा खींच कर उसके बदन से अलग कर चुका था। वो अब घबड़ा कर अपने हाथों से अपने चुचियों को ढ़कने सी कोशिश की। मैंने मुस्कुराते हुए उसकी ठोढ़ी को हल्के से ऊपर उठाया और उसके होठ पर एक गहरा चुम्बन लिया।मैं अब उसको अपनी गन्दी बातों से गरम करने की सोचा, उससे हट कर गहरी नजर से उसको देखते हुए कहा, “पता है विभा… मर्दों को किसी लड़की की यही अंग बताता है कि लड़की जवान हो गई है।

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भगवान इसको ऐसा ही बनाए हुए हैं कि जहाँ लड़की पर जवानी चढ़ना शुरु होती है यह पूरे दुनिया को उसका खबर देना शुरु कर देता है। १३-१४ साल की उम्र से लगातार यह मर्दों को बताता रहता है कि लड़की अब कितना जवान हुई है और इसीलिए तभी से सब लड़के उस पर लाईन मारना शुरु कर देते है। जितनी कम उम्र हो और चुची जितनी बेहतर… लड़की उतना ही बढ़िया “माल” मानी जाती है मर्दों की दुनिया में। तुम्हारी चुच्ची तो जबर्दस्त है। पता नहीं कितनों ने तुम्हारे नाम की मूठ मारी होगी, और तुमको कुछ पता भी नहीं है।” विभा चुप-चाप मुझे देखते हुए सब सुन रही थी। मैंने आगे कहा, “१५ साल की उम्र में जब पहली बार तुम ब्रा खरीदी थी तब से लगातार हर दो-तीन दिन पर तो मैं हीं तुम्हारे नाम की मूठ मारता रहा हूँ, आज भी जब तुम ब्लू-फ़िल्म देख रही थी और मैं मुठ मार रहा था तब भी मेरे दिमाग में तुम्हारा हीं बदन था। अब एक बार अपना हाथ हटा कर अपने चुचियों का दीदार करा दो न प्लीज…”। विभा का चेहरा लाल-भभूका हो गया था और वो मुझे अजीब नजर से देख रही थी। तब मैंने एक बार फ़िर ईशारा किया कि वो अपने हाथ हटाए तो उसने इस बार मेरी बात मानते हुए अपने हाथ अपने कंधों से हटाए जिससे मुझे उसकी ३६ साईज की गोल-गोल गोरी चिट्टी चुचियों के दर्शन हो गए। जिस तरीके से उसने मुझे अपनी चुचियों के दीदार कराए थे, मुझे उसकी रजामन्दी समझ में आ गई। मैंने फ़िर आगे कहा, “विभा… मेरी बहना… अब प्लीज एक बार खड़ी हो जाओ न मेरे सामने।” वो मेरी बात मान ली और बिस्तर से नीचे उतर कर मेरे सामने सिर्फ़ एक पैन्टी पहने खड़ी हो गई। विभा तीनों बहनों में सबसे कम लम्बी थी, सिर्फ़ ४’-१०”। उसको शायद इस बात की कुंठा भी थी थोड़ा-बहुत। पर अभी उसके इस छोटे बदन पर ३६” की टाईट छाती गजब लग रही थी।मैंने अपने होठ सिकोड़ कर सीटी बजाई और फ़िर कहा, “विभा प्लीज… अब खुद से अपनी पैन्टी उताड़ों न प्लीज…।

कितना अच्छा लग रहा है यह सब। तुम बताओ.. न तुमको मजा आ रहा है कि नहीं।” विभा अब बोली, “बहुत अजीब लग रहा है.. लगता है कि कैसे यह सब हो रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे कैसे आपके सामने मैं …. वो छीः भैया…” और वो अपना चेहरा अपने हथेलियों से ढ़क ली। अब मैं भी उसके सामने खड़ा हो गया और पहली बार उसके बदन से अपना लण्ड सटाया और फ़िर हल्के हाथ से उसकी चुच्ची सहलाते हुए उसको समझाने लगा, “क्यों बेकार बात सब सोचती हो… मैं बताया न … सालों से मैं तुम्हारे नाम की मूठ मारता रहा हूँ, मुझे तो तुम सिर्फ़ एक जवान लड़की लगी… तुम क्यों मुझमें अपना भाई अभी देख रही हो। समझो कि तुम एक मर्द को अपना बदन दिखा कर उसको पटा रही हो। मेरा हाल सोचो… मेरा लण्ड कैसा बेचैन है (मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी पेट में जोर से दबाया) और मुझे पता है कि आज जो लड़की मेरे साथ है वो आज नहीं चुदेगी फ़िर भी मैं जितना तुम मुझे दोगी उसी से खुश हूँ कि नहीं। चलो अब मान लो कि मैं तुम्हारा लवर हूँ और तुम अपना बदन आज पहली बार अपने लवर को दिखा रही हो। मैं भी तुमको आज सिर्फ़ अपनी गर्लफ़्रेन्ड मान कर तुम्हारे बदन से खेल कर तुमको मजा दुँगा।” वो अब फ़िर से शान्त और संयत लगी तो मैं अब उससे हट कर बेड पर बैठ गया और कहा, “डार्लिंग… अब एक बार प्लीज अपनी पैन्टी उतार कर अपना सबसे प्यारा और सुन्दर चीज दिखाओ न मेरी रानी…” और मैंने उसको आँख मारी। मेरी इस अदा पर उसकी हँसी निकल गई और फ़िर …. लड़की हँसी तो फ़ँसी…। विभा बोली, “छी… भैया मुझ बहुत शर्म आ रही है यह सब करते।” मैंने भी तुरंत कहा, “शर्म काहे की अब… और तुम्हारी छोटी बहन को तो भरे ट्रेन में चुदाते हुए शर्म नहीं आई और तुम यहाँ बन्द कमरे में… जब चुदना भी नहीं है इतना ड्रामा कर रही हो।” फ़िर मैंने कहा, “अब दिखाओ न प्लीज विभा… अब अगर नहीं दिखाई और मुझे तुम्हारी पैन्टी उतारनी पड़ी तो आज जबर्दस्ती तुमको चोद देंगे… समझ लो… तुमको पता हीं है कि मैं वैसे भी बहनचोद हूँ।”विभा अब हँसती हुई बोली, “छी… कैसा गन्दा बोलते है आप… पता नहीं स्वीटी को क्या समझ में आया। वहाँ कौलेज में तो इतना लड़का होगा फ़िर क्यों आपसे…”। मैंने बीच में ही कहा, “क्योंकि भगवान मुझे बहनचोद और मेरी बहन को रंडी बनाने का सोचे हुए थे… अब दिमाग मत लगाओ और जल्दी से अपना बूर दिखाओ… मेरा मन पागल हुआ जा रहा है। प्लीज विभा.. प्लीज… मेरी प्यारी बहना… प्लीज दिखाओ न अपना बूर…”। एक छोटे बच्चे की तरह मचलते हुए से थोड़ा बच्चों की तोतली आवाज की नकल करते हुए अब यही रट लगाने लगा था, “दिखाओ ना विभा अपना बूर… दिखाओ ना बहना अपना बूर…

दिखाओ ना दीदी अपना बूल(बूल)… मुझे देखना है दीदी तुम्हारा प्यारा-प्यारा बूल(बूर)… मेली(मेरी) प्याली दीदी, मेली(मेरी) छोनी(सोनी) दीदी… एक बाल(बार) दिखाओ ना दीदी अपना खजाना.. प्लीज दीदी… प्लीज… प्लीज… प्लीज…”। मुझे ऐसा करते देख कर उसकी तो हँसी छुट गई और आँखों में डबडबाए हुई आँसू गायब हो गए। विभा अब खिलखिला कर हँस दी। मैं अब और ज्यादा बच्चए की ऐक्टिंग करते हुए बोला, “मुझे तुम्हाला (तुम्हारा) दुद्दू (दुद्धू) पीना है… मम्मी अपना दुद्दू(दुद्धू) मेले(मेले) मुँह में दो ना… मुझे निप्पल चुस के दुद्दू (दुद्धू) पीना है… मुझे भूख लगी है… ऊंऊंऊं..ऊंऊंऊं…”। मैंने रोने की ऐक्टिंग की तो विभा की हँसी और जोर हो गई। सिर्फ़ दो मिनट में उसका मूड पूरा से बदल गया था। अपनी हँसी को काबू में करते हुए वो अब बोली, “वोहो मेले(मेरे) प्याले(प्यारे) बेते(बेटे)… भुख्खु-भुख्खु…. आ जाओ दुद्दू(दुद्धू) देती हूँ और उसने सच में अपना दायाँ चुच्ची अपनी हथेली से पकड़ करके मेरी तरह आगे बढ़ा दिया और मैंने बिना समय गवाँए उसकी गुलाबी निप्पल अपने होठों में जकड़ के सही में चुभलाने लगा था। वो उम्मीद कर रही थी कि मैं एक बच्चे की तरह चुसुँगा पर मैं तो एक प्रेमी की तरह उसके चुचियों से खेलने लगा था और वो भी अब सिसकी लगाने लगी थी। जवानी की आग में उसका बदन तपने लगा था पर वो थी की पिघल हीं नहीं रही थी। कुछ समय बाद मैं फ़िर से अलग हो कर अपनी पुरानी बात पे आ गया, “मम्मी.. अब अपना बूल(बूर) दिखाओ ना प्लीज”। विभा को अब ऐक्टिंग में मजा आने लगा था तो भी बोली, “गन्दी बात… मम्मी की वो सब नहीं देखते… गन्दी बात होती है।” मैं बोला, “पल(पर) पापा को तो तुम दुद्दू(दुद्धू) भी पिलाती हो और अपना बूल(बूर) भी चातने(चाटने) देती हो… मुझे तो सिर्फ़ देखना है एक बाल(बार)।” विभा बोली, “वो तुम्हारे पापा हैं बेटा, उनका हक है… वो तुम्को पैदा किए हैं…”।

मैंने आगे कहा, “मुझे सब पत्ता है… वो तुमको चोदे हैं तब मैं पैदा हुआ हूँ…”। मेरा मन अब ज्यादा रुकने का नहीं था सो मैंने अब सीधे-सीधे कहा, “दिखाओ ना विभा… क्या ड्रामा कर रही हो… इतने से कम रीक्वेस्ट में तो विनीत अपनी कमसीन बेटी को मेरे सामने नंगा करके खड़ा कर देता। विभा भी अब अपने हाथ कमर पर ले जाकर अपनी पैन्टी में ऊँगली फ़ँसा कर बोली, “छी भैया… कैसे हैं आप, विनीत भैया की बेटी तो अभी बिल्कुल बच्ची है”। मैं विभा की नंगी हो रही बूर पर नजरें टिकाए हुए बोला, “ऐसी बच्ची भी नहीं है अब, नींबू जितनी हो गई है उसकी छाती… विनीत का कहना है कि एक साल लगेगा नींबू को संतरा बनने में… और मैं कह रहा हूँ कि तीन महीने में दीपा की छाती संतरे जितनी हो जाएगी… १००० रु० की शर्त लगी है हम दोनों में।” विभा अब अपना नंगापन भुल गई और बोली, “कितना गन्दा सोचते हैं आपलोग… बेचारी को पता भी नहीं होगा और आप दोनों दोस्त अभी से…”। मैंने अब विभा से कहा, “छोड़े दीपा को… अभी उसको तैयार होने में समय लगेगा… तुम तो तैयार माल हो मेरी रानी”। मैं उसकी झाँटों से भरी बूर पर नजर टिकाए हुए था। वो अभी भी हमारे शर्त के बारे में सोचते हुए बोली, “बेचारी दीपा… अभी गोद में खेलने की उम्र है उसकी और आप दोनों उसकी जवानी पर शर्त लगाए बैठे हैं”। मैंने कहा, “तेरह पार है… टीनएजर है अब एक साल से… और गोदी में तो लड़कियों को मर्द-लोग उम्र भर खिलाते हैं… आओ मेरी गोदी में मैं तुम्हें बीस की उम्र में भी गोदी में खिलाऊँगा… और जब तीस-चालीस की हो जाओगी तब भी… एक बार टीनएज में लड़की आई कि वो माल हो गई मर्दों के लिए”। मैंने हाथ पकड़ कर विभा को अपनी तरफ़ खींचा और फ़िर हल्के से घुमा कर उसको अपनी गोद में बिठा लिया। मैं बिस्तर के किनारे पैर नीचे लटका कर बैठा था और विभा मेरी गोद में ऐसे बैठी जैसे कुर्सी पर बैठी हो। उसका पीठ मेरे सीने से सटा था और मेरा लन्ड उसकी चुतड़ की फ़ाँक से दबा हुआ था। मैं अपने बाएँ हाथ से उसकी चुच्चियों को संभाले हुए था और दाहिने हाथ से उसकी झाँटों को सहला रहा था। कम-से-कम तीन इंच जरुर था झाँट सब, और वो खुब फ़ैला हुआ नहीं था। सब-का-सब बूर की फ़ाँक के इर्द-गिर्द हीं जमा हुआ था और फ़ाँक का कुछ अंदाजा नहीं चला, वो शायद अपना जाँघ भींच कर रखे हुए थी। मैंने उसको हल्के से अपने गोदी से उतारा और फ़िर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके कमर के पास पालथी मार कर बैठ गया। विभा का छोटा सा ४’-१०” का गोरा-चिट्टा नंगा बदन मेरे सामने बिस्तर पर फ़ैला हुआ था और मैं टकटकी लगाए उसकी फ़ूली हुई बूर के ऊपर उगे ३-४” के काले-काले घुंघराले झाँटों पे नजर जमाए हुए था। मेरे मुँह से निकला, “क्या माल है यार… बहुत सुन्दर हो विभा… मेरी प्यारी बहना…”। विभा मेरे मुँह से अपनी बड़ाई सुन कर फ़ुली ना समाई और कहा, “मेरी लम्बाई ही तो कम है…५ फ़ीट भी नहीं है”। मैंने कहा, “ऐसी कम भी लम्बाई नहीं है तुम्हारी…. और फ़िर लड़की की जवानी लम्बाई में नहीं, उसके चुच्ची और बूर में बसती है। प्रभा और स्वीटी का तो देखी हो ना कैसा छोटा है चुच्ची उन दोनों का। मैंने बताया था न कि हर मर्द लड़की के बदन पर नजर डाल कर सबसे पहले उसकी चूच्ची हीं नापता है अपने दिमाग में और तुम्हारी तो जबर्दस्त है ३०”/९०से०मी०… एकदम सही है किसी माल के लिए। अब जाँघ खोलो अपना तो बूर देखें”। उसने अपनी जाँघ फ़ैला दी। मैंने अपनी दाँई हथेली से उसकी बूर को टटोला और बोला, “माय गौड… कितना गर्म है रे तुम्हारा… इस्स्स्स… हाथ जल जाएगा”।

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Update kro bhai

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मैंने हाथ जल्दी से हटाया, तो वो मेरी इस स्टाईल पर हँसी और बोली, “क्या सच में…”। मैं भी उसी तरह बोला, “सच नहीं तो क्या मैं मुच बोलुँगा…” और मैंने अब अपना चेहरा नीचे झुका कर उसकी झाँट से आ रही कसैले गंध को खुब प्यार से महसूस किया। उसे लगा की मैं वहाँ चाटुँगा, सो वो हड़बड़ा कर बोली, “चाटिए नहीं भैया… पेशाब वगैरह लगा रहता है उसमें गन्दा है अभी”। मैंने उसको समझाया, “पगली…. चाटेंगे तभी तो सुरसुरी होगा तुम्हारे बदन में और मजा मिलेगा… और एक बात सेक्स में कुछ गन्दा नहीं होता है। वैसे भी जिसको प्यार किया जाए वो गन्दा कैसा… यह छेद तो हर मर्द को सिर्फ़ मजा देता है। मर्द चाहे कोई हो पति हो, ब्वायफ़्रेन्ड या भाई या कोई और…” कहते हुए मैं उसके जाँघ को और खोल कर अपना एक ऊँगली उसकी फ़ाँक पर चला कर उसके बूर के गीलेपन से गीला हुए ऊँगली को मैंने उसको दिखाते हुए चाटा… कसैला-खट्टा सा स्वाद मिला हल्का सा मुझे और मेरा लन्ड एक ठुनकी मारा और झड़ गया। लण्ड से निकला पिचकारी विभा की जाँघ पर फ़ैल गया। विभा इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दी या शायद उसके खुद के सनसनाते हुए बदन में उसको इस्का पता हीं नहीं चला कि क्या हुआ है।मैं गौर कर रहा था कि विभा के पूरे बदन से बाल साफ़ थे, शायद उसने हाल में हीं हेयर-रिमुवर लगाया था… बस सिर्फ़ झाँट हीं इतनी बड़ी-बड़ी थी कि क्या बताऊँ। मैंने जब यही बात विभा को बताई तो वो बोली, “वहाँ का बाल कभी साफ़ हीं नहीं की हूँ। शुरु-शुरु में मम्मी से बोली थी तो वो कही कि अभी से बाल साफ़ करोगी तो सब बाल कड़ा हो जाएगा।

प्रभा दीदी तो शुरु से बाल साफ़ करती थी पापा के रेजर से, मैं मम्मी की बात मान लेती पर वो चुरा-छुपा के बाल साफ़ कर लेती थी। वो कहती थी, कि उसको बाल अच्छा नहीं लगता है… पर मुझे तो कभी कुछ खास परेशानी नहीं हुई सो क्यों साफ़ करती। अब तो आदत हो गया है”। मैं यह सब सुनते हुए उसकी पेट और नाभी से खेल रहा था और बीच-बीच में कोई चूची मसल देता तो वो बोलते-बोलते रुकती और एक हल्की सी कराह उसके मुँह से निकल जाती। मैंन अब उसकी गहरी नाभी में अपनी जीभ घुमा रहा था और उसको गुदगुदी लग रही थी तो वो कसमसाने लगी। तभी मैंने उसके जाँघ खोल कर अपना एक हाथ उसकी बूर की फ़ाँक पर चलाने लगा। उसकी बूर पूरी तरह से पनियानी हुई थी। मैंने उसके बूर के पानी से हीं अपना ऊँगली गीला करके उसकी फ़ाँक के ऊपरवाले हिस्से, जहाँ टीट होती है हल्के-हलके मसलने लगा। जल्दी ही उसको समझ में आने लगा कि यह कुछ नया हो रहा है। वो अब जोर-जोर से साँस लेने लगी थी। बीच-बीच में एक मीठी कराह उसके मुँह से निकल जाती। मैंने अपने ऊँगलियों से उसकी फ़ाँक खोली और फ़िर उसकी फ़ूली हुई मटर जितनी साईज के टीट को जोड़ से रगड़ा और वो जोर से चीख पड़ी। उसकी आँखें अब मस्ती से ऊपर की तरह पलटने लगी थी। वो अपने-आप को मेरे गिरफ़्त से छूड़ाना चाहती थी, पर मैं उसके कमर को कुछ ऐसे दबाए हुए था कि बेचारी छुट न सकी। वो अब गिड़गिड़ाई, “भैया अब नहीं…. ओअओह…. अब छोड़ दीजिए”। मैंने मसलना धीमा किया तो वो थोड़ा शान्त हुई। फ़िर मैंने कहा, “विभा, यह तो ट्रेलर था मस्ती का, अब देखना जब मैं जीभ से रगड़ुँगा तब असल मजा आएगा”।

फ़िर मैंने उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगाया और फ़िर उसकी खुली हुई दोनों जांघों के बीच में बैठ कर उसके बूर पर अपना मुँह लगा दिया और जीभ को चौड़ा करके उसके बूर की फ़ाँक को पूरा नीचे से ऊपर तक चाटा। बूर का पानी अब मेरे मुँह में घुल रहा था और मैं मस्ती से उसकी कुँवारी, अनचुदी बूर का स्वाद लेने लगा था। अनचुदी बूर का स्वाद लाजवाब होता है… और अगर वो अपनी छोटी बहन की हो तो फ़िर क्या कहने। विभा की सिसकियाँ पूरे कमरे में फ़ैल कर माहौल को शानदार बना रही थी। करीब १० मिनट तक मैं अलग-अलग तरीके से मैं बूर चुसा तब जा कर वो झड़ गई और मेरे मुँह में कसैले-खट्टे स्वाद पानी सब ओर लिपस गया। झड़ने के बाद वो शान्त हो गई थी और लम्बे-लम्बे साँस ले रही थी। मैं अब उसकी बूर पर से उठा और उसके चेहरे पर नजर डाली। आँख बन्द करके वो निढ़ाल सा बिस्तर पर फ़ैली हुई थी। मैंने विभा की बूर के पानी से लिथड़े हुए अपने होठ विभा के होठ से सटा कर उसको चुमना शुरु किया। मैं बोला, “चाटो न मेरा होठ विभा…”। आँख बन्द किए हुए हीं वो होठ चाटी तो उसको भी अपने बूर के स्वाद का पता चला शायद… बुरा सा मुँह बनाते हुए वो अपना आँख खोली और कहा, “उः… कैसा स्वाद है… पेशाब जैसा लग रहा है… छीः”। मैंने हँस कर कहा, “तुम्हारे बूर का स्वाद है…तुमको खराब लग रहा है”। विभा बोली, “छीः… कैसे आप उसको इतना देर से चाट रहे थे। बहुत गन्दे हैं आप भैया”।

मैं बोला, “ज्यादा बोली तो मुँह में लौंड़ा पेल देंगे, समझी जानूं….” और एक जोर का चुम्मा उसके होठ पर जड़ कर मैंने पूछा, “चुद्वाएगी क्या मेरी प्यारी बहना…?” मैं अपना लन्ड सहला रहा था। वो बोली, “धत्त….” और ऊठ कर बैठ गई और अपने कपड़े पहनने लगी। मैं समझ गया कि अभी ज्यादा तेजी बेकार है सो मैं भी अब जिद छोड़ दिया। मुझे यकीन था कि जल्द हीं विभा अपना सील मुझसे हीं तुड़वाएगी। अपने घर का माल थी सो हड़बड़ी में काम बिगड़ भी सकता था तो मैं भी अब अपना बरमुडा उठा लिया। विभा ब्रा-पैन्टी पहनकर अपना सलवार-कुर्ती ले कर अपने कमरे की तरफ़ चल दी। मैंने कहा भी कि मेरे साथ ही सो जाए, तो वो बोली कि नहीं सुबह रीना (मेरे घर की कामवाली बाई) आएगी। साढ़े बारह के करीब हो चला था तो मैं भी सोने की तैयारी में लग गया।अगली सुबह मैं वाक से आया तो विभा नहा धो कर पूजा कर रही थी और कामवाली झाड़ु-बुहारू में लगी हुई थी। मैं भी नहा धो कर आया विभा नास्ता के टेबुल पर मेरा इंतजार कर रही थी, काम वाली तुरन्त गई थी और घर पर सिर्फ़ हमदोंनो ही थे।
मैंने कल वाली बात दुहराई, “कल सोने में अच्छा लगा, उस सब के बाद?”

“हाँ भैया, बहुत गहरी नींद आई। बदन के रोम-रोम का दर्द जैसे निकल गया था। एकदम हल्का लग रहा था बदन सोते समय”, विभा बोली।
नास्ता करते हुए मैंने कहा, “यह तो कुछ भी नहीं है, जब सही चुदाई कराओगी फ़िर पता चलेगा”।
विभा बोली, “सही कह रहे हैं भैया आप…., अब तो लगता है कराना पड़ेगा।”
मैं चहका, “चलो फ़िर बिस्तर पर… कि यही चुदाओगी…”।
वो मुझे झिड़की, “हत्त…. अभी सुबह-सुबह आप भी क्ता बात ले कर बैठ गए। शाम में फ़िर जैसे कल किए थे वैसे हीं करेंगे”।


मैंने मुँह बनाते हुए कहा, “ठीक है…अगर उतने से ही संतुष्ट हो, पर मेरे लन्ड का क्या? कल तो बेचारा खुब हीं बेहाल हुआ और फ़िर निढ़ाल हुआ”।
“क्यों… जैसे पहले ब्लू-फ़िल्म देख कर हस्तमैथुन करते थे कर लीजिएगा”, वो मुस्कुराते हुए बोली और फ़िर नास्ता का सब प्लेट वगैरह ले कर चली गई।
मैं भी जिद नहीं कर रहा था। मेरी सबसे छुईमुई बहन, विभा, आज एक दिन के बाद खुद अपने मुँह से मुझसे मुख-मैथुन के लिए तैयार थी और यह मेरी बड़ी उपलब्धि थी। मुझे पता था कि आज न काल वो मेरे से हीं सील तुड़वाएगी। आज दिन भर मुझे काम में मन न लगा और बार-बार विभा का अनछुआ बदन मेरे दिमाग में आ रहा था। शाम को करीब ६ बजे हीं मैं घर के चल दिया। सात बजे के करीब घर आया। विभा मुझे देख कर हैरान रह गई और खुश भी हुई। मेरे हाथों में चाय देते हुए बोली, “मेरे बदन के लिए आप आज जल्दी घर आ गए”। मैंने थोड़ा झेंपते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है पर जब आ गए हैं तो फ़िर आज हमलोग जल्दी शुरु कर देंगे। इससे आराम से देर तक एक-दुसरे के बदन से खेलने का मौका मिलेगा।” विभा बोली, “ठीक है… मैं जल्दी से खाना बना लेती हूँ” फ़िर हमलोग खेलेंगे”।करीब आठ बजे तक विभा किचेन से फ़्री हुई और पसीने से लथपथ मुझसे बोली, “नहा के खाना लगा देती हूँ… ठीक है”। मैंने कहा, “खाना हम लोग बाद में खाएँगे, पेट भारी होने से मजा कम मिलेगा। आओ पहले हमलोग अपना बदन ढ़ीला कर ले फ़िर खाना-वाना आराम से खाएँगे”।

विभा बोली, “ठीक है… मैं दो मिनट में नहा के आई…”। मैंने उसकी कलाई पकड़ी और अपने पास खींचते हुए कहा, “क्या विभा डार्लिंग, पसीने की गन्ध तो प्यार करने वालों के एक टौनिक है… जब सही से चुदोगी तब इसी पसीने के बहने में असल मजा मिलेगा। आ जाओ डार्लिंग जैसे हो…मन बेचैन हो रहा है”। विभा मुस्कुराते हुए मेरी गोद में बैठते हुए बोली, “वाह रे, एक दिन में डार्लिंग बना लिए… अब आज के बाद गर्लफ़्रेन्ड बना लीजिएगा क्या?” मैंने उसकी दोनों चुचियों को कपड़े के ऊपर से मसलते हुए कहा, “तुम जो कहोगी मैं वही बना लुँगा तुमको। अब तो मैं तुम्हारे बदन का गुलाम हूँ”। वो खुब प्यार से पूछी, “आपको क्या मन है… आप मुझे क्या बनाना चाहते हैं”। मैंने उसके होठ से अपने होठ मिलाए और फ़िर कहा, “बताऊँ, मुझे क्या मन है… तुम बूरा मान जाओगी”। विभा ने कहा, “नहीं बूरा मनुँगी, अब बताईए न आपको क्या मन है”? मैंने भूमिका बाँधते हुए कहा, “वैसे यह होगा नहीं पर मेरा बस चले तो मैं तुम्हें इंटरनेशनल पोर्न-स्टार बनाऊँ। खुब सारी ब्लू-फ़िल्म में तुम काम करो। पूरी दुनिया तुम्हें पहचाने और फ़िर तुम्हारे नाम की मूठ मारे”। विभा बोली, “छी… कोई अपनी बहन के लिए ऐसे बोलता है। बहुत गन्दे हैं आप”। मैंने उसके पेट सहलाते हुए कहा, “क्यों, आखिर ब्लू-फ़िल्म की हीरोईन सब भी तो किसी की बेटी और बहन होती है। लड़की अपने बाप-भाई से चुदा सकती है और ब्लू-फ़िल्म में काम नहीं कर सकती, ये क्या बात हुई…”। वोभा अब सोचते हुए बोली, “हाँ बात तो सही है, अच्छा भैया… आज आप कोई बहुत गन्दी फ़िल्म दिखाईए ना मुझे।” मैंने कहा, “ठीक है पर मेरा ईनाम…”। मेरी बहन बात समझते हुए बोली, “मिलेगा…. आज न कल पर मिलेगा यह तय है। …कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर…”। उसने मुझे भरोसा दिलाया। मैं उसको ले कर अपने रुम में आया और फ़िर कंप्युटर औन करके बोला, “एक फ़िल्म है लोकल लड़की की।

उसके मामा का टेलरिंग शौप है, उसी दुकान में उस लड़की को उसका मामा और एक उसका दोस्त चोदा है। करीब तीन साल पुराना विडियो है, अब तो लड़की की भी शादी हो गई है पुर्णियाँ में। कभी चलोगी तो उसको भी दिखा दुँगा, वो सेल्सगर्ल है टाईटन शो-रुम में। विडियो मस्त है…. देखोगी या कोई विदेशी गन्दा सा फ़िल्म लगा दूँ”। विभा उत्तेजित हो कर बोली, “कहाँ मिला ऐसा विडियो….?” मैंने कहा, “५००० में खरीदा उसके मामा से। लड़की का नाम सलमा है, तो सलमा नाम से है कंप्युटर पर… अगर कभी देखना हो बाद में तो”। विडियो अब शुरु हो गया था। एक सोफ़े पर एक १६-१७ साल की लड़की नीले सलवार सुट में बैठ कर सामने टीवी पर एक ब्लू-फ़िल्म देख रही थी और उसके अगल-बगल दो मर्द बैठ कर शराब पी रहे थे। दोनों की उम्र ४०-४२ के करीब थी। लड़की बिना उन मर्दों की तरफ़ देखे सीधे टीवी पर नजर गराए थी पर वो दोनों कभी-कभी अपना ग्लास उसके होठे से सटाते तो वो एक चुस्की शरब पी लेती, अगर वो दोनों उसकी तरफ़ सिगरेट करते तो एक कश ले लेती। जब वो करीब ७-८ चुस्की शराब पी ली तब उसने एक बार मना कर दिया, “अब नहीं मामूजान…”।

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उसका मामा उसको सिखाया, “अरे सलमा बेटा, मामूजान नहीं फ़ैज बोलो… ये क्या बात हुई कि नूर को तो नूर मियां बोलती हो और मुझे मामू…”। नूर ने उसको चिढ़ाया, “अबे साले तू उसका मामा है तो बोलेगी ही। उसको तो मैंने पटाया था तू तो बीच में कबाब में हड्डी बन कर आ गया है… क्युँ सलमा”। फ़ैज ने कहा, “अरे तो फ़िर इसका निकाह भी तो अपने साले से तय कराया है…. लड़का अरब में है, अच्छे घर में जाएगी, मजे करेगी तो एक बार मुझे भी तो हक है… क्यों सलमा”। सलमा बिना कुछ कहे चुप-चाप सब देख रही थी। फ़ैज हीं पहले सलमा को अपनी बाँहों में लिया। सलमा कसमसा कर अपने को अलग करने की कोशिश की और अपनी नजर टीवी पर टिकाए थी। विभा यह देख कर बोली, “लग रहा है लड़की बेचारी को ये दोनों फ़ँसा कर लाए हैं”। मैंने कहा, “फ़ँसाना तो नहीं… लड़की खेली-खाई हुई है… वो सब जानती है कि उसको आज यहा क्यों लाया गया है। हो सकता है कि लड़की शायद मामा से यह सब करते शर्मा रही हो”। विभा मेरी हाँ में हाँ मिलाई, “सही कह रहे हो भैया, नहीं तो ऐसे इन दोनों के साथ नहीं बैठती”।सलमा को उसका मामा अब बाहों में समेट कर चुम रहा था वो भी जल्दी से एक-दो बार चुम कर फ़िर अपनी नजर टीवी पर कर लेती थी, जैसे दिखा रही हो कि उसको इस सब में नहीं ब्लू-फ़िल्म देखने में इंटरेस्ट है। नूर अब एक नया सिगरेट जलाते हुए अपने दोस्त से बोला, “ठीक है यार, आज तू ही चढ़ ले इसपर पहले, मैं तो वैसे भी कई बार इसको चौड़ा किया है”। फ़ैज अबतक सलमा को खींच कर अपनी गोद में बिठा चुका था और अभी भी वो सामने टीवी देख रही थी जबकि उसका मामा उसकी चुचियो को कुर्ते के ऊपर से ही मसल रहा था।

जब उसके अपना हाथ उसकी बूर की तरफ़ किया तो सलमा ने उसका हाथ पकड़ा और फ़िर उसको रोकते हुए अपनी तीरछी नजर से अपने मामा को देखा। उसके मामा ने अपने दोस्त को ईशारा किया और तब नूर ने सलमा के हाथ पकड़ कर ताकत के साथ फ़ैला दिया और इसबीच फ़ैज ने सलमा की सलवार नीचे सरार दी। सलवार में डोरी नहीं एलास्टिक लगा हुआ था। दर्जियों के परिवार से थी वो। हालाँकि वो अपने हिसाब से थोड़ा विरोध की और उसकी आवाज सुनाई दी, “फ़िल्म देखने दीजिए न पूरा मामूजान”। फ़ैज ने कहा, “देख लेना बेटा, सब सलवार उतार रहा हूँ… गर्मी लगेगी न तुम्को मेरी गोदी में”। उन दोनों ने उसकी सलवार खींच कर उसके बदन से अलग कर दी। इस चक्कर में उसकी झाँटों भरी बूर और चुतड़ सब कैमरे में कैद हो गया। वो अब बिना सलवार के सोफ़े पर बैठ गई और फ़ैज उसके सामने खड़ा हो कर अपना कपड़ा सब खोला और पूरा नंगा हो गया फ़िर सलमा का हाथ पकड़ कर अपने ढ़ीले लण्ड को पकड़ने का ईशारा किया। सलमा भी टीवी देखते हुए अपने मामा का लण्ड सहलाते हुए उसको आगे-पीछे करने लगी। फ़ैज का लन्ड जो ढ़ीली हालत में था धीरे-धीरे लम्बा होने लगा और टाईट भी। जब वो आधा टाईट हो गया तो फ़ैज आगे झुक कर सलमा के होठ चुसने लगा। सलमा भी अब आँख बन्द करके चुमने में साथ दी तो फ़ैज फ़िर से उसके बगल में बैठ कर सलमा को दुबारा अपनी गोद में बिठा लिया। उसका दोस्त नूर सलमा की सलवार उतरवा कर फ़िर से पास में बैठ कर सब देख रहा था और सिगरेट पी रहा था। जब सलमा फ़ैज की गोद में बैठ रही थी उसने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया तो सलमा चिहुँकी, “ओह दर्द करता है ऐसे मत करो”। नूर ने अब प्यार से उसको चुमा और कहा, “अच्छा मेरी जान”, उसकी चूची सहलाई और फ़िर कुर्ते के ऊपर से ही उसके निप्पल को ऊँगलियों के बीच ले कर हल्के से मसला। फ़ैज तो गोदी में बैठी हुई अपनी भांजी के जाँघों को सहलाते हुए फ़ैलाने की कोशिश करने लगा था और सलमा थी कि अपने जाँघ जोर से सिकोड़ लेती थी। फ़ैज फ़िर झेंप गया तो नूर उसकी परेशानी समझ कर निप्पल मसलते हुए सलमा के कुर्ते को एक झतके से पकड़ा और उसके सर के ऊपर से खींच लिया। जबतक सलमा कुछ समझे, उसका आधा कुर्ता उसके सर की तरफ़ से बाहर हो गया था। वो हड़बड़ा कत फ़ैज की गोद से उठी और अपने कुर्ते को पकड़ने का अंतिम प्रयास किया, पर तब तक देर हो गई थी। कुर्ता उसके बदन से गायब हो गया था। इस क्रम में उसके हाथ जो ऊपर हुए तो उसकी काँख के काले-काले लम्बे बाल दिख गए। मैंने विभा से कहा, “ये लड़की भी तुम्हारी तरह की है, अपना बाल नहीं साफ़ करती है”। वो इसबार तपाक से बोली, “मैं तो अपना काँख का बाल रेगुलर साफ़ करती हूँ गर्मी में, नहीं तो स्लीवलेस कैसे पहनुँगी… जाड़ा में भले थोड़ा आलस हो जाए”। मैंने हँसते हुए पूछा, “और झाँट…?” वो बाद बदली, “अभी देखने दीजिए… अपने किशनगंज की लड़की कितनी मौड हो गई है कि फ़िल्म बनवाती है”। मैंने मन ही मन कहा, “तुम्हारी भी फ़िल्म बनाऊँगा मेरी बहना फ़िर तुम्हीं को दिखाऊँगा”। स्क्रीन पर अब नंगी सलमा फ़ैज की गोद में बैठी थी और फ़ैज कभी उसकी चुचियों तो कभी पेट या फ़िर कभी झाँटों भरी बूर को सहलाते मसलते दिख रहा था।

सलमा की चुची का साईज किसी आम लड़की की तरह था, अभी उन्होंने अपना पूरा साईज नहीं पाया था पर आकर्षक साईज था। सलमा का रंग सांवला से थोड़ा साफ़ था पर मेरी बहनों मे वो कम गोरी थी। तभी नूर सोफ़े से उठा और अपने कपड़े उतार कर वो भी नंगा हो गया। उसका लन्ड भी लूज था, ४५ साल की उम्र में सब का लूज ही ज्यादा रहता है। वो अब सोफ़े के पास आया और सलमा के करीब हो कर अपना लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर सलमा को ईशारा किया तो वो उस लूज लन्ड को अपने मुँह में लेकर चुसने लगी। वो भी अब बीच-बीच में सलमा की चुचियो और निप्प्ल से खेल लेता। उस सलमा के बदन पर चार मर्दाने हाथ लगे हुए थे। वो जब सर को एक तरफ़ घुमा कर नूर का लन्ड चुस रही थी तब उसका जाँघ भी थोड़ा खुल गया था और फ़ैज अब आराम से उसकी बूर की फ़ाँक से खेल रहा था।मैं विभा को बोला, “विभा डीयर, अब मेरा भी तुम थोड़ा सहला दो ना” और मैं अपने बरमुडा को खोल कर अपने खड़े लन्ड को उसके सामने लहराया। विभा एक नजर मेरे खड़े लन्ड पर डाली और बोली, “आपका तो पहले से इतना कड़ा है… अभी देखने दीजिए इस फ़िल्म को पूरा से फ़िर आपके बारे में सोचुँगी”। मैंने भी बहस को बेकार समझा और हलके हाथ से अपने लन्ड को सहलाते हुए फ़िल्म देखेने लगा। नूर का लन्ड जब टनटना गया तो वो फ़ैज से बोला, “यार, अब शुरु करो… कितना खेलोगे इसकी फ़ाँक से। अब तो मेरा भी तनटना गया है”। फ़ैज यह सुन कर अब सलमा को अपनी गोदी से उठा दिया और उसको सोफ़े पर चित लिटाया। सलमा भी अब बिना कोई विरोध किए आराम से सोफ़े पर लेट गई और अपने पैरों को घुटने से हल्के से मोड़ कर सोफ़े की पीठ से सटा लिया। उसका दुसरा पैर सोफ़े के नीचे जमीन पर टिका हुआ था। वो अब बोली, “आप दोनों में पहले कौन आ रहा है…”? सलमा अपने बूर की फ़ाँक पर अपना थुक लगा रही थी बार-बार। नूर बोला, “आज पहले अपने मामू को चढ़ा लो फ़िर बाद में मैं चोद लुँगा। बेचारा बहुत बेकरार है तुम्हारे छेद लिए”।

सलमा अब अपने मामू को ईशारा की और फ़ैज तुरन्त सोफ़े पर अपना एक घुटना टिका कर अपने दाहिने हाथ से अपना लन्ड को पकड़ कर सलमा की बूर से लगा कर धक्का दिया। पर सलमा की कमसीन जवानी या फ़िर उसके मामा की उत्तेजना, फ़ैज का लन्ड जो साधारण सा था करीब ५” का, वो सलमा की बूर में नहीं घुसा और फ़िसल गया। फ़ैज ने फ़िर कोशिश की और फ़िर यही बात। दो तीन बार जब वो असफ़ल हो गया तो सलमा उठ कर बैठी और फ़िर अपने मामू का लन्ड ले कर जोर-जोर से चुसने लगी। मैंने विभा को बताया, “लड़की एक्स्पर्ट है, देखो कैसे लन्ड को और ज्यादा कड़ा कर रही है”। विभा चुप-चाप सब देख रही थी। सलमा फ़िर से अब फ़िर लेट गई थी और इस बार वो अपने हाथ से अपने मामा का लन्ड पकड़ कर अपनी बूर में घुसा ली और फ़िर अपने मामा को थोड़ा झुक कर धक्के लगाने को बोली। उसका मामा फ़ैज अब वैसे ही आगे की तरफ़ झुक कर ऊपर से अपने कमर हिला-हिला कर धक्के लगाने लगा। सलमा भी मजे के साथ अपना आँख बन्द कर ली और चेहरे बनाने लगी। तभी नूर आगे आया और सलमा की छाती के पास बिल्कुल उसके मामा की तरह दोनों तरफ़ घुटने सोफ़े पर सलमा की दोनों तरफ़ टिका कर सलमा की मुँह में अपना लण्ड घुसा दिया। इसके बाद नूर भी बिल्कुल ऐसे धक्के लगा-लगा कर सलमा की मुँह में लण्ड डालने लगा जैसे वो भी सलमा को चोद हीं रहा हो। विभा अब मेरी तरफ़ घुम कर बोली, “कैसा लग रहा यह यह देख कर… दोनों बुढ़े कैसे बेचारी की छेद में अपना-अपना घुसा रहे हैं”। मैंने कहा, “यह तो कुछ नहीं है… लड़की को भगवान तीन-तीन छेद दिए हैं, वो एक साथ तीन लन्ड को मजा दे सकती है”। विभा बिना कुछ सोचे-समझे बोली, “तीन?… कहाँ दो हीं न… एक मुँह और एक नीचे..”।

मैंने कहाँ, “और गाँड़ को तुम क्यो भूल गई मेरी बोली बहना… सुनी नहीं हो ’गाँड मारना’, प्रसिद्ध गाली है यह तो – गाँड़ मराओ”। वो बोली, “अरे उस छोटे से छेद में किसी लड़के का कैसे घुसेगा… असंभव”। मैंने कहा, “ठीक है अब दिखाऊँगा तुम्हे एक फ़िल गाँड मराई बाली तब समझ में आएगा। किसी लड़की की बूर की चुदाई तो आम बात है, सब चुदती है… पर विशेष बात तब होती है जब लड़की की गाँड़ मारी जाती है। अभी नूर जो कर रहा है उसको लण्ड चुसना नहीं कहते है, कहेंगे कि नूर सलमा की मुँह मार रहा है। बूर में चुदवाने से ज्यादा कलाकारी का काम है मुँह या गाँड़ मरवाना”। विभा अब खुब रुची के साथ पूछी, “ऐसा क्यों भैया, मुँह मराना तो बहुत आसान लग रहा है… हाँ वो वाला का छेद बहुत छोटा है तो इसमें परेशानी समझ में आती है”।


हम दोनों सलमा को नूर और अपने मामा से मस्ती लेते हुए देख रही थे, और मैं अपनी बहन विभा की जानकारी बढ़ा रहा था। मैंने उसको समझाते हुए कहा, “असल में सलमा गाँड़ मराई में छेद तो एक आसान समस्या है, असल समस्या है गाँड़ के भीतर की बनावट। गाँड़ करीब ३-४” भीतर एकदम से पीछे यानि पीठ की तरफ़ मुड़ जाती है और लन्ड को उस मोड़ पर आगे जाने में परेशानी होती है और जोर का धक्का अगर ऊपर से कोई लगा दिया तो बहुत तेज दर्द होता है गाड़ के भीतर”। यन सब जानकारी बिभा के लिए नई थी तो वो बोली, “ओह… फ़िर”। मैंने हँसते हुए कहा, “फ़िर क्या… यही तो लड़की की कलाकारी है, वो कभी अपना पेट सिकोड़ेगी तो कभी कमर ऊपर-नीचे करके एक बार अगर लन्ड को भीतर धीरे-धीरे घुसवा ले फ़िर लन्ड को आगे परेशानी नहीं होती है और तब लन्ड खुद अपना रास्ता बना कर बार-बार अंदर-बाहर होता रहता है। मुँह के साथ भी यही बात है, कोई भी ६-७” का लन्ड आसानी से कंठ तक पहुँच जाएगा और फ़िर तुम्हें खाँसी आ जाएगी। जब तुम चुसोगी तो तुम तय करोगी कि कितना भीतर लो, पर जब लड़का तुम्हारी मुँह मारेगा तो वो तय करेगा कि कितना तुम्हारे मुँह में घुसाए और तब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा दम घुट रहा है। इसलिए लड़की को यह कला आना चाहिए कि कैसे और कब साँस रोक कर लण्ड को भीतर ले”।अब तक नूर का सलमा की मुँह में छुट गया और वो अब सलमा के ऊपर से हट गया था और उसका मामा अब उसकी चूची मसलते हुए खुब जोर-जोर से धक्के लगाए जा रहा था।

सलमा सब देखते हुए बोली, “आप तो बहुत बात जानते हैं भैया, कहाँ से सीखे यह सब…”। मैंने कहा, “ब्लू-फ़िल्म और लड़कियाँ सींखाई हैं सब…”। अब विभा ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए पूछी, “हुंहुं…, लड़कियाँ… कितनी भैया…? मैंने अब थोड़ा शर्माते हुए कहा, “अब तक १९…”। विभा अब बोली, “अच्छा भैया, क्या स्वीटी के साथ आप सब चीज किए, वो विडियो तो ऐसा नहीं था”। मुझे कुछ समय लगा कि वो यह जानना चाहती थी कि क्या मैंने स्वीटी की गाँड़ और मुँह भी मारी है। तब मैंने कहा, “नहीं, स्वीटी के साथ सिर्फ़ चुदाई किए हैं ३-४ बार। गाँड़ तो उसकी रूम-मेट है न गुड्डी उसकी मारे थे, बल्कि वही सिखाई गाँड़ मारना। वहाँ से आने के बाद एक बार एक कौल-गर्ल की गाड़ मारे हैं यहीं किशनगंज में। वो अब आश्चर्य से बोली, “अपने किशनगंज में है कौल-गर्ल…?” मैंने कहा, “हाँ, यहाँ जो लड़कियाँ आस-पास के गाँव से शहर पढ़ने आती है और इधर-उधर होस्टल में रहती है वो सब दोपहर में दो घन्टे आती है कई होटल है”। अब विभा पूछी, “कितना पैसा मिलता है उनको”? मैंने कहा, “पता नहीं, पर होटल वाला २००रू०, ३००रू०, ४००रू० से ५००रू० प्रति घन्टा या ज्यादा भी, लेता है, जैसी लड़की वैसा दाम… और रूम का अलग से २००रू”। लड़की को इसका आधा तो जरुर देता होगा”।

सप्ताह में एक-दो दिन भी आ गई तो उसका पौकेट खर्च निकल जाएगा”। सलमा को अब दोनों नीचे दरी पर लिटा दिए थी और फ़िर वैसे हीं चोदने लगे थे, इस बार नूर उसको चोद रहा था और उसका मामा उसकी मुँह मार रहा था। मामा को ऐसे सामने देख वो बार-बार अपना चेहरा अपने हाथ से छुपाती तो उसका मामा खुद अपने हाथ से उसका हाथ चेहरा पर से हटा देता। उसको अपनी भांजी को ऐसे देख कर मजा आ रहा था। विभा थोड़ी देर चुप-चाप सब देखी फ़िर अचानक बोली, “आप कितना दिए उस कौल-गर्ल को”? मुझे उसके साथ ऐसे बात करके मजा आ रहा था। मैंने सच कहा, “दो दिन में ४०००रू०… पहले दिन १००० दिए और सिर्फ़ चोदे, और उसी बार अगले बार के लिए बात कर लिए गाँड़ मराने के लिए। वो रेट डबल माँगी गाँड़ मरवाने का, तो हम अगले दिन २०००रू गाँड़ मराई का और १०००रू० सीधी चुदाई का दिए”। गाँड़ वाला २०००रू० तो सीधा उसका हो गया, क्योंकि होटलवाले को यह सब पता नहीं था। तीन घंटा समय लिए थे तो होटल का किराया भी ज्यादा देना पड़ा”।विभा बोली, “लड़की कैसी थी देखने में”? मैंने कहा, “सांवली थी, पर फ़ीगर से मस्त… बी०ए० फ़र्स्ट ईयर की थी। बनमंखी के पास के गाँव की थी, जाति से राजपूत पर गरीब…”। यहाँ करीब एक साल से हैं, पर होटल में तीन महीने से आना शुरु की है। उसका डीटेल रख लिए हैं, बाद के लिए… अच्छी लड़की है, बहुत मजा आया उसके साथ”। अब तक दोनों सलमा की दोनों छेद में फ़िर से झड़ गए थे और सलमा अपना बदन साफ़ कर रही थी। विभा अचानक से पूछी, “अगर मुझे होटल में जाना पड़ा तो कितना मिलेगा मुझे”? मैंने उसको अपने बाँहों में भर लिया, तुम्हारे बूर के लिए तो बोली लगेगा, नीलाम होगी तुम। कुँवारी, अनचुदी बूर तो अनमोल होती है, वैसे भी शक्ल-सुरत के हिसाब से भी तुम्हारा दाम ७००रू० से ८००रू० तो कम-कम से कम होगा”। विभा आराम से मेरी गोदी में बैठ गई।

मैं नीचे से नंगा तो पहले से था सो वो खुद अपने चुतड़ों की फ़ाँक के बीच में मेरा लन्ड फ़ँसाअ कर आराम से बैठ गई थी, तब मैंने कहा कि अब ध्यान से देखो सलमा को… अब असल मजा आयेगा उसको”। विभा को लग रहा था कि फ़िल्म खत्म हो गई है, क्योंकि सलमा अपना बदन तौलिए से साफ़ करने लगी थी। वो बोली, “अब कौन मजा आएगा, दोनों बुढ़े तो अब साईड हो गए हैं”। मैं अब उसको ज्ञान देते हुए कहा, “मेरी बेवकूफ़ बहना, और वो जो फ़ोटोग्राफ़र है, वो फ़ोकट में इतना मेहनत किया है, फ़िल्म बनाया है”। जब तक मेरी बात पूरी हो सीन में एक २५-२६ साल का जवान लड़का नजर आया, बिल्कुल नंगा, अपने टनटनाए हुए ८” के लन्ड के साथ। मैंने विभा को बताया कि इसी लड़के के साथ सलमा का निकाह तय है। वो इसकी चुदाई करेगा और दोनों दोस्त इसकी फ़िल्म बनाएँगे। अब देखना, अभी तक जो सलमा इतना चुप-चुप से चुद रही थी कैसे बेचैन हो कर चीख-चीख कर चुदाएगी। विभा फ़िर से पूरे मन से फ़िल्म देखने लगी।

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बिना किसी भूमिका के सलमा की चुदाई शुरु हो गई थी और वो खुब मस्त हो कर चुदा रही थी। ऐसे भी जब कोई लड़की अपने दुल्हा से चुदती है तो टेंशन फ़्री हो कर चुदाती है और खुब मस्ती देती है। जिन यार-दोस्तों ने अपनी बीवी को चोदा होगा, उन्हें पता होगा कि शुरुआती दौर में वो कैसे मस्त मजे देती है। विभा भी मन से सब देखती रही और मैं विभा की चुचियों को मसलते, चुमते, चाटते अपना समय काट रहा था और भगवान से मना रहा था कि विभा अब जल्दी से मान जाए। खैर फ़िल्म खत्म हुई और तब विभा बिना किसी हील-हुज्जत के खुब आराम से मेरे टन्टनाए हुए लन्ड को चुस कर झाड दी, फ़र्क सिर्फ़ इतना हुआ कि आज वो कुछ ज्यादा प्यार से मेरे लन्ड को पूरा का पूरा निगल रही थी और इसमें उसको अपने चेहरे और गले को थोड़ा एड्जस्ट भी करना पर रहा था। फ़िर अपने कपड़ पहनने लगी तब मैं बोला, “यार विभा, अब तो मान जाओ… तब तक मेरे लन्ड को तड़पाओगी?” विभा भी मुस्कुराते हुए बोली, “मन तो अब मेरा भी खुब करता है पर…. फ़िर लगता है कि भैया से कैसे भीतर घुसवाऊँ…।’ मैंने तपाक से कहा, “क्यों??? जैसे स्वीटी घुसवाई… और फ़िर तुमको सिर्फ़ लेटे रहना होगा और बाकी सब मैं कर लूंगा। तुम बस अपना आँख बन्द कर लेना अगर तुमको मेरा चेहरा नहीं देखना तो, और सोचना कि तुम्हें तुम्हारा पति चोद रहा है।” विभा मुस्कुराई और सो तो है….कह कर कमरे से निकल गई। मैंने उसको सुनाते हुए कहा, “देख लेना विभा, एक दिन मेरे हाथ से तुम्हारा बलात्कार हो जाएगा साली…”। उसने मुझे एक फ़्लाईंग किस दिया, “तब का तब देखा जाएगा…”। मैं अकेला अपने लन्ड को हाथ में पकड़े बुद्धु की तरह बिस्तर पर पडा रह गया।

मैंने सोचा कि अगर यह लडकी मेरे से नहीं चुदेगी तो उसको किसी और से चुदा देता हूँ, फ़िर उसको चोद लुँगा, फ़िर एक विचार आया कि क्यों ना उसको जबर्दस्ती पकड कर चोद दूँ, एक बार जब चुद जाएगी तब शायद आराम से चुदे…। इसी उधेड़बुन में नींद आ गई।अगली सुबह नाश्ते के समय विभा ने मुझे खबर दी कि उसका पीरियड शुरु हो गया है सो अब वो मेरे सामने नंगी नहीं होगी। मैंने मन मसोस कर कहा, “ठीक है, पर मेरा तो चुस दोगी न…?” वो हाँ में सर हिलाई और कहा, “आप इतना अच्छा-अच्छा फ़िल्म दिखाते है तो उसका ईनाम तो आपको कम से कम इतना तो जरुर मिलेगा”। मेरे यह पूछने पर कि कब तक उसके बूर की तरफ़ से रेड सिगनल है…, वो हंसते हुए बोली, “अब आज से तो शुरु हुआ है थोड़ा सा… तो अगले दो दिन तो जरुर, शायद तीसरे दिन भी”। मुझे अब काम से निकलना था सो मैं निकल गया।

वैसे भी अब जल्दी घर आने से कुछ फ़ायदा तो होना नहीं था, मैंने विभा पर कई तरह से दबाब बनाया पर सब बेकार, सो अब मैं भी उसको भुल-भाल कर अपने काम में ध्यान लगाया और सोचा कि अब जरा इसको असल में गन्दी वाली कुछ क्लीप दिखाऊँग, अगले तीन-चार दिन में। घर लौटते समय मैं बाजार से दो, बेहद गन्दी फ़िल्मों की डीवीडी ले आया था – एक जानवर वाली, और दुसरी बलात्कार वाली। जानवर वाली के कभर पर हीं घोड़े, कुत्ते, गाय आदि की फ़ोटो थी, और दुसरी वाली में एक लम्बा क्लीप था, करीब ढाई घन्टे का। विडियो बंग्लादेश का था… जिसमें एक कोठे पर नई लडकियों को सीधा करने का विडियो था। उस शाम को मैंने विभा को दोनों विडियो डीवीडी दे दिया, उनकी थीम को ब्ता कर कि देखें वो पहले कौन सा देखना चाहते है। मेरा दिल चाह रहा था कि वो बंग्लादेशी फ़िल्म देखे। जब विभा ने भी उसी को चुना तो मेरा मन खुश हो गया। मैं अब सोच रहा था कि इस फ़िल्म के साथ बात करके उसको मनाने में शायद मान जाए। खैर उस रात वो पहले मेरा लंड झाड़ दी चुस और हिला कर फ़िर हम दोनों विडियो देखने बैठे। विडियो बंग्ला में था, पर हम दोनों बंगाली समझते हैं।

किशनगंज बंगाल के पास हीं है और यहाँ बहुत सारे बंगाली परिवार हैं। फ़िल्म में गाँव-देहात से छः जवान कमसीन लडकियों को कुछ लोग लाए थे और कोठे पर उनका सौदा कर रहे थे। दो लडकियाँ साड़ी में थीं, तीन सलवार कुर्ते में और एक फ़्राक पहने हुए थी। लड़कियाँ अलग कमरे में थीं। जब वो लोग अपना पैसा ले कर चले गए तब, एक आदमी, जो उम्र में ४२-४३ तो कम से कम जरुर था, लडकियों वाले कमरे में आ कर उनको बताया कि उनके साथ के लोग चले गए हैं और अब उन सब को यहीं रहना होगा और मर्दों के साथ धंधा करना होगा। चार तो चुप रही, पर दो लडकियों ने हंगामा शुरु कर दिया। दोनों बहनें थे, और उनकी बात-चीत से पता चला कि उनका नाम नसरीन (साडी वाली) और जुबैदा (फ़्राक वाली) है। उस मर्द ने उन दोनों को समझाया कि उनको कोई परेशानी नहीं होगी, और फ़िर बाकी लड़कियों का उदाहरण भी दिया कि वो सब कैसे शान्त है, पर वो दोनों बहन तो पूरा नाटक कर रही थी। हल्ला सुन कर उस कमरे में दो और मर्द आ गए। वो दोनों भी उम्र में ३६-३८ के दिख रहे थे। उनके साथ मासीमा अर्थात मौसी (कोठे की मालकिन) भी थी। उस औरत ने भी उन्हें खुब समझाया। उन दोनों को उनके मामा ने वहाँ ला कर बेचा था। उस औरत ने उनको समझाया कि उनका मामा उन दोनों के बदले जो रुपया ले कर गया है और उस रुपये से उसके घर में खुशहाली आएगी। वो दोनों भी समय-समय पर अपने घर रुपये भेज सकती है। पर जब वो दोनों किसी हाल में कुछ सुनने को तैयार नहीं हुई तो उसने अपना हुक्म जारी किया कि उन दोनों बहनों को तब तक चोदा जाए जब तक वो यह सब मान न लें और फ़िर वो वही कुर्सी लगा कर बैठ गई और आवाज दे कर सब के लिए चाय लाने को कहा। तीनों आदमी अब उन लड़कियों की तरफ़ बढ़े।

तभी हिम्मत करके नसरीन जो बड़ी थी, करीब १९-२० की, उसने पास आते एक मर्द तो एक चांटा लगा दिया और उसके बाद तो उस मर्द ने गन्दी-गन्दी गालियाँ देते हुए ताबड़-तोड तीन-चार चाँटे नसरीन की गाल पर जड दिए और उसका गाल लाल कर दिया। नसरीन को अब दो मर्द पकडे थे और एक जुबैदा को अपने बाँहों में जकड़े हुए था। उन दोनों बहनों को बाकी की लड़कियों से अलग घसीट कर वो ले गए।

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